Search This Blog

Thursday, November 24, 2011

एक ही पुरखे हमारे हैं

वीरता से भरे वीररस के विख्यात कवि श्री अरविन्द पथिकजी को  उनकी  सद्यः  रचित  बेहतरीन  कविता के लिए बहुत-बहुत बधाई. उनकी निम्न पक्तियाँ बेहद पसंद आयीं, देखिए--

 हमें भी रंज़ होगा क्योंकि तू हिस्सा हमारा है
हज़ारों साल से तो एक ही किस्सा हमारा है
बंटी धरती बंटी नदियां बंटे दिल भी हमारे हैं

मगर अब क्या करें ज़ब एक ही पुरखे हमारे हैं 



Post a Comment