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Monday, December 19, 2011

कलम को सलाम

शोभा रस्तोगी
आपकी लघुकथा पढ़कर मन आंसु ओं से भीग गया। नन्हे-नन्हे बच्चों के जिस्म से आपने जीवन के भावुक सत्य को जिस बारीकी से खंगाला है उसके लिए आप की कलम को समाम करता हूं।
पंडित सुरेश नीरव
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