There was an error in this gadget

Search This Blog

Friday, December 30, 2011

गजेसिंह त्यागी की कविता

गत दिनों आदरणीय गजेसिंह त्यागी की कविताओं से गुज़रने का मौका मिला ।उनके कुछ बेहतरीन दोहों को आपको सौंप रहा हूं---
१-        पिता मेरे परमात्मा सब   पितरों की खान
          त्यागी उनकी कृपा से बढे भक्ति औ ग्यान

२-       अच्छे कर्मों के लिये कभी न करिये देर
         ना जाने किस बात से मौका मिले न फेर

३-       जाति-पाति के भेद को रखे जो मन से दूर
         सच्चा पूत भी है वही,वही है सच्चा   सूर

४-         धोखा ,बेईमानी कर, चले चाल पे चाल
           त्यागी ऐसे मूढ का सदा बुरा हो   हाल

५-        ध्यान बंटा हो आपका मन भीतर हो चोर
          भूल जायेंगे आप फिर मन-मंदिर का मोर

६-        सोच -समझ कर बोलिये, रंच न करो गुमान
          रावण जैसों का यहां बच न सका अभिमान

७-        अफसर-नेता में लगी धन कमाने की होड
          खाली पेट जनता फिरे,मन में उठे  मरोड

८-       युद्ध आये तो युद्ध कर   ,बनकर सेवादार
        पुण्य कर्म से ही    तेरा होना है ,उद्धार

९-       त्यागी इस संसार में सब पैसे का  खेल
         निर्धन से भगवान भी करते नहीं हैं मेल

१०-     कविता तो यक भाव है,जिसका ओर न छोर
        इसकी संध्या है नहीं ,    सदा रहत है भोर

११-    कविता बननी चाहिये ,   जनशिक्षा का स्रोत
        सबको अच्छे भाव  से,    कर दे ओत--प्रोत

१२-      कविता ऐसी चाहिये , समझ सके सब कोय
         पढ --सुन सब आनंद लें,अच्छी शिक्षा  होय

१३-      शांति-संपन्नता रहे ,    रहे प्यार का साल
         आने वाला वर्ष हो,   सुख-समृद्धि----मिसाल

१४-        धनवर्षा होती रहे, सुख संपति के साथ
           त्यागी की है ,कामना रहे प्रभू का हाथ
   
Post a Comment