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Sunday, January 15, 2012




भारत के विषय में क्या कहते हैं विदेशी विद्वान :

फ़्रान्स्वा एम. वोल्तेयर
मैं सुनिश्चित हूं कि खगोलशास्त्र, ज्योतिष, देहांतरण, आदि सारा ज्ञान गंगा के तट से आया है।
यह बहुत महत्वपूर्ण तथ्य है कि कोई २५०० वर्ष पूर्व, पाइथागोरस निश्चित ही रेखागणित सीखने सामोस से गंगा गया था। किन्तु उसने यह कठिन और अनजान यात्रा कभी न की होती
यदि यूरोप में ब्राह्मणों के विज्ञान की प्रतिभा की धाक वर्षों से न जमी‌ होती।. . . . .
स्रोत : ' आक्रमण जो कभी‌ हुआ ही नहीं' - मिशैल दनीनो तथा सुजाता नाहर
वेद सर्वाधिक मूल्यवान प्रतिभा-दान थे जिसके लिये पश्चिम पूर्व का सदा ही ऋणी रहा है।. . . .
स्रोत : ' आत्मा का साम्राज्य ' - भारत में कुछ यात्राएं - पोल विलियम राबर्ट
भारत की आवश्यकता पूरी पृथ्वी को है, और भारत को किसी की आवश्यकता नहीं। ..
हमने प्रदर्शित कर दिया है कि भारत से साहस और क्रूरता में कितने आगे हैं, और विवेक में हम उनसे कितने पीछे हैं। हम यूरोपी देशों ने इस ज़मीन पर एक दूसरे को नष्ट कर दिया है, जहां हम केवल धन की खोज में गए, जब कि ग्रीक इसी देश को गए मात्र अपने को शिक्षित करने । . . . . .
स्रोत : फ़्रगमां हिस्तोरीक सुर लेन्द – वोल्तेयर
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आइन्स्टाइन पीठासीन जान आर्किबाल्ड व्हीलर
मुझे ऐसा लगता है कि पूर्व के चिन्तक सर्व ज्ञाता थे, और यदि हम उनके हलों को अपनी‌ भाषा में ढाल सकें तब हमें अपने सारे प्रश्नों के उत्तर मिल जाएंगे ।. . . .
स्रोत : 'अनकामन विज़डम ' - फ़्रित्याफ़ काप्रा
यह बहुत ही अनोखी बात है कि श्रायडिन्जर, नील्स बोर, ओपैनहाइमर जैसे व्यक्ति उपनिषदों के ज्ञाता थे ।. . . .
मैं विचार करता रहता हूं कि कोई इसकी खोज करेगा कि भारत का गहनतम चिन्तन किस तरह यूनान और फ़िर वहां से आधुनिक दर्शन तक पहुँचा।
स्रोत : 'इंडियन कांकरर्स आफ़ माइन्ड' – सैबल गुप्ता
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महान अमैरिकी दार्शनिक रैल्फ़ वैल्डो एमर्सन
वेद मुझ पर छाए रहते हैं। मुझे उनमें अपरिमेय शक्ति मिलती‌ है; अखण्ड शान्ति मिलती है;
और जो शाश्वत मिलता है वह अन्यत्र नहीं मिलता, वे मेरे लिये ज्ञानपूरक हैं।. . .
स्रोत : ' द कमैमोरेटिव संस्कृत सुवनिर २००३ ' - भारतीय विद्या भवन
समस्त विज्ञान भावातीत है, अथवा वह इतिहास के गर्त में चला जाता है। वनस्पति विज्ञान को अब सही सिद्धान्त मिल रहे हैं - ब्रह्मन के अवतार प्राकृतिक इतिहास की पाठ्य पुस्तकों में‌ होंगे।
स्रोत : ' इंडियाज़ प्राइसलैस हैरिटेज ' - नानी ए. पाल्खीवाला
तुच्छ वस्तुओं से भरी, विचारों से घृणा करने वाली, मिथ्या अभिमान से पूरित दैहिक सभ्यता के लिये पौर्वात्य उदारता से बढ़कर कोई उपचार नहीं है।
स्रोत : 'निबन्ध 'वी :' २५८-९ ' - रैल्फ़ वैल्डो इमर्सन
यह (हिन्दू धर्म) हमें सत्य बोलना, दूसरों से प्रेम करना और तुच्छ को छोड़ना सिखाता है। पूर्व महान है - और दिखलाता है कि यूरोप तुच्छताओं की भूमि है। सब कुछ आत्मन् है, तथा आत्मन् सर्वशक्तिमान है।
स्रोत : द वैस्ट लुक्स एट इंडिया - कृष्णानंद जोशी
ऐतिहासिक सन्दर्भ : १८५७ में भारत स्वतंत्रता का यदि प्रथम नहीं तो द्वितीय युद्ध लड़ रहा था.

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नोबेल पुरस्कृत फ़्रान्सीसी साहित्यकार रोमैं रोलां
यदि पृथ्वी पर कोई ऐसा स्थल है जहां, आदि काल से मानव ने जीवन का स्वप्न देखना प्रारंभ किया,
और जहां जीवन्त मनुष्य के समस्त सपनों को आकार मिला, वह स्थल भारत है। . . . .
स्रोत : ' फ़िलोसफ़ी आफ़ हिन्दुइज़म : एन इंट्रोडक्शन' – टी सी गैलव
हिन्दू धर्म में धार्मिक आस्था को कभी भी वैज्ञानिक नियमों की विरुद्ध दिशा में कार्य करने नहीं दिया गया;
कभी भी हिन्दुत्व के ज्ञान की शिक्षा के लिये आस्था को अनिवार्य नहीं माना गया;
और वे सदा ही निष्ठापूर्वक सतर्क होकर अपने विचारों में यह संभावना रखते रहे कि
बुद्धि के द्वारा अज्ञेयवादी तथा अनीश्वरवादी भी अपने पथों से 'सत्य' को पा सकें।
स्रोत : 'विवेकानन्द – परिशिष्ट ' - रोमैं रोलां
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