There was an error in this gadget

Search This Blog

Wednesday, January 4, 2012

शरद जायसवाल की क्षणइका

अब
ये सूरज ढल गया
बाती को ले
तू जल दिये !
गठरी
नुमा इंसान की
ठठरी
बनाई चल दिये !!
Post a Comment