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Thursday, March 22, 2012

श्री बी.एल.गौड़ अमृत महोत्सव


श्री बी.एल.गौड़ अमृत महोत्सव
तीर्थ चेतना के 
गीतमुखी ऋषि
पंडित सुरेश नीरव
ख्यातिलब्ध साहित्यकार एवं श्री बी.एल.गौड़ एक ऐसे रचनाकार हैं जो ख़ुद कविता में रहते हैं और कविता इनमें रहती है। ऋषि-वाणी और ऋजु व्यवहार के वे एक ऐसे यौगिक युयुत्सु हैं जिसमें शरद की रेशमी-गुनगुनी धूप और पूर्णिमा की शुभ्र चांदनी एक साथ टहल करती हुई बतियाती हैं। और इनके होठों से झरता शब्द-शब्द मालकौस अपने पूरे वजूद  और शिद्दत के साथ इनके गीतों में आकर ठहर-संवर जाता है। श्री गौड़ चेतना की उस उदगीथ ऊंचाई को उपलब्ध हैं जहां जीवन की अमृतमयी मंगल उर्जा अनवरत असमाप्त महोत्सवों के उत्सवधर्मी लास्य के साथ अनुभूति और अभिव्यक्ति की शुभात्मक कथन-भंगिमा के रूप में रूपांतरित होती रहती है। श्री बी.एल.गौड़ सिर्फ़ वयोवृद्ध ही नहीं है बल्कि साधनावृद्ध और ज्ञानवृद्ध भी हैं। मैं शपथपूर्पक कह सकता हूं जो भी सहृदयी व्यक्ति  इनके सन्निकट आएगा वह साहित्य की त्रिआयामी वृद्धि के इस प्रयाग व्यक्तित्व की तीर्थ चेतना की गीतमुखी लचकन और खनकन की अनुगूंज से झंकृत हुए बिना रह ही नहीं सकता। अप्रितम विनयवीर का जिसकी विनम्रता ताक़त और मृदुलता हथियार है,सृजन के ऐसे वैष्णव योद्धा का हमारे बीच होना ही अपने आप में एक समय सापेक्ष उत्सव है। यह उत्सव दीर्घायुष्य मुद्रा में अपने यश की अगर-गंध से हमारे समय के सृजन को अपनी मुकद्दस पाकीज़गी से मह-मह महकाता रहे। इन्हीं स्वस्ति सदकामनाओं के साथ अक्षर ब्रह्म से मैं महा-मनुहार करता हूं कि वो वेदों के-जीवेम शरदः शतम महावाक्य को श्री बी.एल.गौड़ को सदा के लिए वरदान रूप में न्यौधावर कर दें।क्योंकि वे सचमुच इसके हकदार हैं। तथास्तु....।
                                                           पंडित सुरेश नीरव
                                                          (विख्यात कवि एवं पत्रकार)
                                                  आई-204,गोविंदपुरम,ग़ज़ियाबाद-201013
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