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Friday, August 10, 2012

बेहद दुःख.

आदरणीय श्री श्री 1008 शब्दऋषि श्री नीरवजी,

 मैं अपनी व्यक्तिगत विवशता के कारण ग्वालियर एवं संपर्क से बंचित रहा. बेहद दुःख. 
आप सभी को ग्वालियर शब्द यग्य में शामिल होने के लिए बहुत-बहुत शुभकामनायें, पालागन.


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