There was an error in this gadget

Search This Blog

Friday, September 28, 2012

गजल की नई अदांयेगी

गजल की नई अदांयेगी  बहुत पसंद आई, दिल से बधाई,आपके ही अंदाज में -
जो ख़ौफ सोच में था उसे दफ़्न कर दिया
यादों के मकबरों में नया जश्न कर दिया। 


प्रतिक्रिया 

कर कुछ और रहे थे, प्रतिक्रिया  दे गए,
तुम्हारी गजल के जश्न में यों खो गए। 



भगवान  सिंह हंस 
Post a Comment