There was an error in this gadget

Search This Blog

Monday, September 24, 2012

जिन्दगी ढो रहा है

आदमी!
कितना नासमझ हो गया है,
दूसरे के सोच में खो गया है,
वह  जिन्दगी  जी  नहीं रहा , 
सिर्फ जिन्दगी को ढो रहा है। 






Post a Comment