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Thursday, September 13, 2012

बहुत कुछ हो भी जाता है।

श्री भगवानसिंह हंसजी...
आपकी भावुक टिप्पणी के लिए आपको बहुत-बहुत धन्यवाद।
आप-जैसे मित्रों की शुभशंसाएं बहुत कीमती होती हैं। उससे बहुत कुछ करने का मन बनता है। बहुत कुछ हो भी जाता है।
मेरे पालागन्...
पंडित सुरेश नीरव

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