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Saturday, September 8, 2012

महान  विचार --
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अद्र्ष्ट ,तो मेरा सहारा है ,
नियत कि डोर पकड़ कर 
मैं निर्भय  कर्म कूप में कूद 
सकता हूँ ,क्योकि  मुझें 
विश्वास है जो होना है 
वह तो होगा ही ,फिर क्यों 
कायर बनूं--
कर्म से क्यों विरक्त रहूँ ---
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****हिंदी साहित्य में छायावाद कही 
जाने वाली साहित्य धारा के 
प्रवर्तक कवि ----जय शंकर प्रसाद ---
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प्रस्तुति ;;;;;;;;;;;;प्रकाश प्रलय 
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