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Friday, October 5, 2012

-'जप-तप,योग-साधना एवं यज्ञ से आगे------------?'




मेरे पुराने मित्र किशोर श्रीवास्तव किसी ना किसी बहाने कुछ नया करते रहते हैं वह चाहें 'हम सब साथ साथ के माध्यम से हो',कार्टून प्रदर्शनी के माध्यम से या फिर फेसबुक मैत्री सम्मेलन के माध्यम से किशोर जी में लोगो को जोडने की अद्भुत कला है।मुझसे उम्र में दशाधिक वर्ष बडे किशोर तन मन से किशोर हैं।वही उत्साह,चंचलता और चापल्य।पुसा में पिछले दिनो कविता प्रतियोगिता का निर्णायक बनाकर लंबे समय से लंबित मुलाकात को निस्तारित कर किशोर ने '२९-३० सितंबर को भरतपुर फेसबुक मेत्री सम्मेलन में चलने का अनुरोध किया और मैने भी बिना दिन -समय का ध्यान दिये स्वीकृति दे दी।तय हुआ पं० सुरेश नीरव जी के साथ कार से भरतपुर जाया जायेगा पर 'लास्ट वर्किंग डे' २९को हो जाने के कारण और कैजुअल लीव न होने से २९ को जा पाना समभव ना हुआ किशोर जी का आग्रह था कि इस कार्यक्रम में शामिल हों।अंततः तय हुआ कि ३० को जाया जाये।
उधर कार्यक्रम के स्थानीय आयोजक अशोक खत्री जी 'अपना घर' की जो तस्वीरें शेयर कर रहे थे वे उत्सुकता कम और जुगुप्सा अधीक जगा रही थी।फिर लगभग १बजे ३० सितंबर को नीरव जी के साथ रसपान करते हुये और उनके साउथ अफ्रीका के संस्मरणों को सुनते बछेरा,भरतपुर स्थित अपनाघर पहुंचे।लंच का समय था तो तुरंत ही बिना परिधान तक बदले भोजन ग्रहण किया।इसी बीच किशोर जी ने कवि सम्मेलन प्रारंभ होने की घोषणा की और बिना कोई पूर्व जानकारी के संचालन के लिये सीधे मेरे नाम की घोषणा कर दी।बडी हतप्रभकारी स्थित में माइक संभाला ना कवियों की रचना प्रक्रिया से परिचय और ना संख्या--बस चढ जा बेटा सूली वालि स्थिति।खैर २५ कवि जिनमे पं० सुरेश नीरव,कृष्णकांत मधुर,साज़ देहलवी,पूनम माटिया,रघुनाथ मिश्र,रिचा मिश्रा,बबली वशिष्ठ,पूनम तुषामद आदि शामिल थे ।केवल कृष्नकांत मधुर और पूनम माटिया और अध्यक्ष पं० सुरेश नीरव पूर्व परिचित ।३ घंटे से अधिक चले इस कार्यक्रम में मुझे कई बार कवियो से आग्रह करना पडा कि वे कृपया अपनी प्रतिनिधि रचना का पाठ करे ।कार्यक्रम की सफलता के संबंध में अशोक खत्री जी की टिप्पणी कि ऐसी कविताये अब कवि सम्मेलनों में कहा सुनने को मिलती हैं ,स्वतः ही बहुत कुछ कह जाती है संचालन के बारे में पं० सुरेश नीरव का कथन था कि इस कार्यक्रम का संचालन विश्व हिंदी सम्मेलन में हुये कवि सम्मेलन से बेहतर था।
कवि सम्मेलन के उपरांत---डा० बी०एम० भारद्वाज ने'अपना घर'को देखने का आग्रह किया और निश्चित रूप से यदि हम 'अपना घर 'ना देखते तो मनुष्यता के होंठो पर उनके द्वारा बिखेरी जा रही मुस्कान को देखने से वंचित रह जाते।'अपना घर'का उद्घोष वाक्य है----'जप-तप,योग-साधना एवं यज्ञ से आगे------------?'सचमुच "अपना घर" इन सबसे आगे है।वास्तव में आज के युग में भी कोई व्यक्ति यों भी मनुष्यता के लिये अपना सब कुछ अर्पित कर सकता है।मैने मदर टेरेसा को नही देखा पर डा०भारद्वाज की धर्मपत्नी माधुरी जी ने आजीवन निःसंतान रहने का व्रत लेकर इन असहायों को सहायता देने का सेवा करने का जो प्रण किया है वह क्या मदर टेरेसा के योगदान से कम बहुमूल्य है और माधुरी जी ही क्यों अशओक खत्री समेत 'अपना घर' के  अनेक स्वयंसेवक जिस तरह से निस्वार्थ सेवा कर रहे हैं वह मनुष्यता का करूणा का महाकाव्य है।निश्चित रूप से यहां आते हुये मन में जो एक भाव था कि कई महीनों बाद पत्नी-बच्चों के साथ संडे मनाने का मौका भी किशोर जी से संबंध निभाने के फेर में निकल गया मिलना मिलाना कुछ हो ना हो ३-४ हजार का चूना ज़रूर लग जायेगा की मंचीय मानसिकता से प्रेरित झल्लाहट 'अपना घर' के कार्यकर्ताओं की निष्ठा -सेवा भावना और करूणा के आगे बहुत शर्मिंदा महसूस कर रही थी।डा० बी०एम० भारद्वाज और माधुरी जी ,अशोक जी किशोर जी आपने जो पुण्य कार्य किया वह स्तुत्य है।
कल अशोक खत्री जी ने बताया कि बबाना,दिल्ली में भी आगामी २८ अक्टूबर को'अपना घर' की साखा का उद्घाटन है तो लगा अभी मनुष्यता की सेवा को बढने वाले हाथ रुके नहीं हैं ,चुके नहीं है।आप सब भी इन हाथों से हाथ मिलायें -------सरकारों का मुह देखे बिना समर्पण से समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाया जा सकता है ये अपना घर ने सिद्ध कर दिया है।मानवता के इस अध्याय से परिचित कराने के लिये किशोर जी,अशोक जी और हठ कर वहां ले जाने के लिये पं० सुरेश नीरव जी का ह्रदय की गहराइयों से आभार--------------।
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