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Wednesday, November 28, 2012

दो ग़ज़लें




पंडित सुरेश नीरव
मध्यप्रदेश ग्वालियर में जन्मे बहुमुखी रचनाकार पंडित सुरेश नीरव की
गीत-गजल,हास्य-व्यंग्य और मुक्त छंद विभिन्न विधाओं में सोलह पुस्तकें प्रकाशित हैं। अंग्रेजी,फ्रेंच,उर्दू में अनूदित कवि ने छब्बीस से अधिक देशों में हिंदी कविता का प्रतिनिधित्व किया है। हिंदुस्तान टाइम्स प्रकाशन समूह की मासिक पत्रिका कादम्बिनी के संपादन मंडल से तीस वर्षों तक संबद्ध और सात टीवी सीरियल लिखनेवाले सृजनकार को भारत के दो
राष्ट्रपतियों और नेपाल की धर्म संसद के अलावा इजिप्त दूतावास में सम्मानित किया जा चुका है। भारत के प्रधानमंत्री द्वारा आपको मीडिया इंटरनेशनल एवार्ड से भी नवाजा गया है। जोहनेसबर्ग दक्षिण अफ्रीका में आयोजित नवम विश्व हिंदी सम्मेलन में आप भारत सरकार के प्रतिनिधि मंडल में भी सम्मिलित किये गए। दूरदर्शन के साहित्यिक कार्यक्रमों के लोकप्रिय संचालक श्री सुरेश नीरव आजकल देश की अग्रणी अखिल भारतीय साहित्यिक संस्था सर्व भाषा संस्कृति समन्वय समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। समय सापेक्ष हूं मैं,जहान है मुझमें, मज़ा मिलेनियम,पोयट्री ऑफ सुरेश नीरव आपकी चर्चित पुस्तकें हैं। और चर्चित सीरियलों में कमाल है,प्रहरी,कंप्यूटरमैन
तथा रंग-रंगीले-छैल-छबीले उल्लेखनीय हैं।
दो ग़ज़लें -

बेताबियों ने कल  नया जश्न कर दिया
यादों के मकबरे में मुझे दफ़्न कर दिया
तकिए में भर के नींद को सोए हुए थे हम
ख़्वाबों में चांदनी ने अजब प्रश्न कर दिया
अर्जुन को जब से ज्ञान दिया तुमने मोक्ष का
श्रद्धा से सबने नाम तेरा कृष्ण कर दिया
नाकाम कोशिशों की हैं किरचें निगाह में
घायल जिन्होंने मेरा हर एक स्वप्न कर दिया
अपने बदन की छांव में सुस्ता रहे हैं लोग
सूरज ने तेज़ धूप में क्या जश्न कर दिया
कब तक जिओगे बेच के अपने ज़मीर को
मुझसे मेरी हयात ने ये प्रश्न कर दिया
मरने से ज़िंदगी ने बचा तो लिया मगर
जब दर्द शायरी में मेरी दफ़्न कर दिया
तनहा उदास शाम की चुप्पी को तोड़कर
इक शोर ने गरीब के घर जश्न कर दिया।
-पंडित सुरेश नीरव

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ग़ज़ल-
दर्द के सूरज को जब लफ़्जौं में ढाला जाएगा
उस ग़ज़ल का रूह के भीतर उजाला जाएगा
जानकर ये बात सांसें हंस रही हैं ज़ोर से
ज़िंदगी का मौत के मुंह में निवाला जाएगा
साफगोई की तलब उसको अचानक क्या लगी
देखना हर वज़्म से उसको निकाला जाएगा
आप तो दरिया खुशी का सौंप सकते हैं मुझे
छलनी-छलनी दिल से वो कैसे संभाला जाएगा
मयकशी में जिसने नीरव पालिया सारा जहां
किस की खातिर अब वो मस्जिद या शिवाला जाएगा।
-पंडित सुरेश नीरव


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