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Thursday, November 8, 2012

धन्यवाद प्रलयजी।

धन्यवाद प्रलयजी।
आपने आलेख को  इतने ध्यान से पढ़ा। दरअस्ल यह आलेख मैंने समाज कल्याण मंत्रालय की पत्रिका के लिए लिखा है। वह मानवाधिकार विशेषांक निकाल रहे हैं। और उनका आग्रह था कि मैं उनके लिए लेख लिखूं। आशा है आप सानंद हैं। मेरे प्रणाम..
-पंडित सुरेश नीरव
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