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Friday, December 21, 2012

जब दिल ही टूट गया

अरविंद पथिकजी,
आप कवि हैं। आपको एक अभिनेता और कवि में फर्क मालुम होना ही चाहिए। जिंदगी भर किसी लेखक के लिखे संवादों पर लिपमूवमेंट करनेवाले अभिनेता-अभिनेत्रियों से बौद्धिक बात की अपेक्षा करना ही फिजूल होता है। और इनके लिए किसी भी तरह च्रर्चा में बने रहना इनकी जिंदगी का सबसे बड़ा मकसद। जो खुद पैसों के लिए कुछ भी और किसी हद तक जाने को तैयार रहते हों ऐसे बिके हुए जमीर के लोग हर घटना को एक सनसनी से ज्यादा कुछ नहीं समझते। इनके लिए काहे का यूपी और काहे का महाराष्ट्र।आप खामखा इनकी बातों को सीरियसली ले रहे हैं। वैसे दिल्ली में आजकल जो आए दिन हो रहा है उस पर थू..थू..के अलावा और कोई क्या करे। दिल्ली यानी भारत का दिल। जब दिल ही टूट गया अब जी कर क्या करेंगे..
-सुरेश नीरव
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