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Wednesday, December 5, 2012


श्लोक अधर मंत्र सी आँखे ,देवालय सा बदन ,,
रामायण सा रूप तुम्हारा ,साँसे वृन्दावन ........
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चूना नगरी कटनी में ,काव्य रस बरसा --
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साहित्यिक संस्था व्यन्गम के तत्वाधान में  देश के चर्चित कवि पं , ,सुरेश नीरव ,
के मुख्य आतिथ्य ,मनोहर मनोज की अध्यक्षता ,प्रकाश प्रलय के सञ्चालन में
चूना नगरी कटनी में काव्य रस बरसा ,,,,
माँ बीणा पाणी की वंदना के साथ ही[ विष्णु बाजपेयी] ने  समारोह का आगाज़ किया
**आजकल विश्वास में देखा है विष का वास है ,
 कल जहाँ पर थे जलाशय ,आज केवल प्यास है ......
   [ अखिलेश दिवेदी  इलाहाबाद ],
मुहब्बत के तराने जब लबो तक
ही न आयेंगे ,देश भक्ति के गीत कैसे गायेंगे ....
  [  डॉ,सुरेश पराग पन्ना ]
ज़रूर एक कविता लिखूंगा अभी नहीं जब तुम्हारे अधरों का रंग
गुलाब की पखुरियों पर बिखर जायेगा ,,,,,,,,,,,,,
   [  चन्दन राय मुंबई ]
 में नहीं चाहता सफाई दो ,गीत  बनकर मुझे सुनाई दो ,
दूर जाओ कि  सिर्फ इतना ,तुमको देखू तो तुम दिखाई दो ;;
[सफर जौनपुरी ]
दिया जलाकर अंधेरो से प्यार करता हूँ ,यही सफर है
यही एक कारोबार करता हूँ ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
[रमाकांत निगम ]
उन्होंने सर मुड्वाया है ,कोई मरा  नहीं बिजली का बिल आया है ,,,,
[मनोहर मनोज ]
रात भर मैं भी जली ,कंदील ने मुझको बताया ...
तुम मुझे ज्यादा चुभे हो ,कील ने मुझको बताया ....
[प्रकाश प्रलय ]
हम कबीर के वंशज ,हम तुलसी के जाये
जितनी खुशिया बांटी हमने उतने आंसू पाये ,,,,
[पं सुरेश नीरव ]
श्लोक अधर मंत्र सी आँखे ,देवालय सा बदन ,,
रामायण सा रूप तुम्हारा ,सांसे व्रन्दावन ;;;;;
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