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Wednesday, June 5, 2013

चिंतन-शिविर का उदघाटन



अखिल भारतीय सर्वभाषा संस्कृति समन्वय समिति
चिंतन-शिविर का उदघाटन
दीप प्रज्जवलन करते हुए पंडित सुरेश नीरव
अखिल भारतीय सर्वभाषा संस्कृति समन्वय समिति का प्रतिनिधिमंडल जो 30 मई को  सुबह गाजियाबाद से रवाना हुआ था,30 मई की रात्रि में ऋषिकेश में रुकते हुए 31 मई की शाम को जोशीमठ पहुंच गया। यहां हमें प्रवासी संसार के संपादक राकेश पांडेय और समकालीन चौथी दुनिया के संपादक प्रवीण चौहान भी मिल गए। और यहीं हमें श्रीनगर से आए संस्था के प्रांतीय संयोजक नीरज नैथानी और उनके मित्र लक्ष्मीचंद खंडूरी और खेमचंद ममगई और योगेन्द्र कंडपाल, लखनऊ से आए विजीलेंस एसपी अखिलेश निगम अखिल, गोरखपुर से आए उमेश कुमार पटेल शिरीष,रामपुर से आए शिव कुमार चंदन,ऋषिकेश से आए धीरेन्द्र सिंह रांगड़,जोशीमठ से आए चरणसिंह केदार खंडी और सूरज कात्यान तथा हरदोई से आए सुखदेव पांडे सरल तथा अन्य प्रतिनिधि भी मिले। यहीं सुबह 10.30 बजे चिंतनशिविर का उदघाटन ज्योतिष-पीठाधीश्वर जगतगुरू शंकराचार्य माधवाश्रमजी के द्वारा उनके आश्रम में स्थित सभागार में आयोजित किया गया।दीप प्रज्जवलित करके शंकराचार्य माधवाश्रमजी ने चिंतन-शिविर का उदघाटन किया। संस्था की राष्ट्रीय महा सचिव डॉक्टर मधु चतुर्वेदी ने स्वागत भाषण पढ़ा और संस्था की गतिविधियों के बारे में विस्तार से बताया। संस्था की ओर से शंकराचार्यजी का शॉल,श्रीफल और प्रशस्तिपत्र देकर सारस्वत सम्मान किया गया। जगतगुरू शंकराचार्य माधवाश्रमजी ने इस अवसर पर अखिल भारतीय सर्वभाषा संस्कृति समन्वय समिति के उद्देश्यों एवं गतिविधियों की प्रशंसा करते हुए भाषा के आपसी मेलजोल को आज की सबसे बड़ी जरूरत बताया। संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष पंडित सुरेश नीरव ने प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए कहा कि हमारा संपूर्ण श्रेष्ठ साहित्य ही हमारा धर्म है। गीता,रामायण,महाभारत,वेद,पुराण और उपनिषद् हमारी साहित्यिक धरोहर हैं और यही हमारे धर्म के प्राण भी हैं इसलिए धर्म और साहित्य के बीच समय सापेक्ष संवाद बहुत जरूरी है। सही मायनों में ग्रंथ ही हमारा सबसे बड़ा गुरु है। साहित्य और धर्म को अलग-अलग कभी किया ही नहीं जा सकता। और अगर ऐसा किया जाता है तो यह समाज और देश के लिए घातक ही होगा। इस प्रथम सत्र का सफल संचालन समिति के राष्ट्रीय सचिव अरविंद पथिक ने किया। इस सत्र के उत्तरार्ध में विभिन्न प्रांतों से आए हुए प्रतिनिधियों को संस्था की ओर से शंकराचार्यजी द्वारा शॉल,श्रीफल और मानपत्र देकर अभिनंदित किया गया। अभिनंदित प्रतिभागियों में राकेश पांडेय(संपादकःप्रवासी संसार),प्रवीण चौहान(संपादकःसमकालीन चौथी दुनिया),विष्णु दत्त शर्मा विराट(संपादकःट्रू मीडिया),अजिता भदौरिया, डॉक्टर मधुलिका सिंह,स्नेह लता, बेबाकजौनपुरी,घनश्याम वशिष्ठ,जयकिशन पेन्यूली,सुखदेव पांडे सरल,नीरज नैथानी, अखिलेश निगम अखिल, के अलावा पंडित सुरेश नीरव,डॉक्टर मधु चतुर्वेदी, रजनीकांत राजू,अरविंद पथिक आदि प्रमुख हैं। सत्र के अंत में संस्था के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रजनीकांत राजू ने आभार वक्तव्य दिया।
(अगली बार पढ़ें-विचार गोष्ठी का विवरण)
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