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Sunday, December 15, 2013

विमलेंदु सागर के अशआर



* सर्वभाषा संस्कृति समन्वय समिति-
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सर्वभाषा संस्कृति समन्वय समिति की कोशिश रहती है कि आज जो लिखा जा रहा है और जो अपने खास अंदाज़ के कारण लोगों की जुबान पर है ऐसे मशहूर अशआरों से आपको रू-ब-रू कराया जाए। लीजिए इसी क्रम में पेश हैं *** विमलेंदु सागर के दो शेर। हमारी यह कोशिश आपको कैसी लगी कृपया अपनी राय ज़रूर दीजिएगा।
*****-सुरेश नीरव

*हार्दिक आभार* हार्दिक आभार* हार्दिक आभार* हार्दिक आभार* हार्दिक आभार* हार्दिक
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***** श्री विमलेंदु सागर के अशआरों पर हमें अपने इन पाठकों की प्रतिक्रियाएं मिली हैं- सर्वश्री- धन्यवाद अजय रस्तोगीजी,संजय कुमार गिरिजी,शिव नरेशजी,कृष्ण मित्रजी,अशोक अरोराजी,धीरज चौहानजी,भीष्म चतुर्वेदीजी,सागर आनंदजी,प्रमोद कुमारजी,सागर सुमनजी,विमलेंदु सागरजी,आदिल रशीदजी,देवीसिंह रौठौड़जी,ओमप्रकाश नौटियालजी,अशोक आंद्रेजी,शशीश कुमार तिवारीजी,गिरीश पंकजजी,प्रवीण कुमारजी,शेखर अस्तित्वजी,ओमप्रकाशजी,प्रगीत कुंअरजी,चेतन रामकिशनजी,रवीन्द्र कुमारजी,दीपा पंतजी,प्रहलाद पारीकजी।

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सर्वभाषा संस्कृति समन्वय समिति की और से हम अपने इन सभी सुधि पाठकों का हार्दिक आभार व्यक्त करते हैं और उम्मीद करते हैं कि भविष्य में भी इसी तरह अपनी राय से हमें अवगत कराते रहेंगे।
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