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Tuesday, February 1, 2011

मेरा तो कुछ नहीं गीत में


मेरा तो कुछ नहीं गीत में
मेरा तो कुछ नहीं गीत में
जो भी है सभी तुम्हारा है
जैसी अनुभूति हुई वैसी
मन कागज़ उसे उतारा है
लिखता कौन लिखाता को है
कलम नहीं जब लिख पाती है
नाद विचरता नाभि सिंधु
जब शब्द शक्ति यह लिखवाती है
जन्मा नहीं अजन्मा लेकिन
भीतर-भीतर उजियारा है
मेरा तो कुछ नहीं गीत में
जो भी है सभी तुम्हारा है।
डॉक्टर जगदीश परमार

Monday, November 8, 2010

ग्वालियर के सुप्रसिद्ध कवि-गीतकार जगदीश परमार

ग्वालियर के सुप्रसिद्ध कवि-गीतकार जगदीश परमार के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर केन्द्रित लोकमंगल पत्रिका ने अपना एक विशेषांक निकाला है,जिसमें उनके जीवन की महत्वपूर्ण घटनाओं, स्वतंत्रता आंदोलन की भागीदारी, जीवन के महत्वपूर्ण प्रेरक प्रसंगों के अलावा,जगदीशजी के रचनात्मक पहलुओं के इंद्रधनुषी रंगों को रेखांकित किया गया है। उल्लेखनीय है कि जगदीश परमार पिछले चार दशकों से काव्यमंचों से जुड़े हुए हैं। और प्रकृति के विविध आयामों में अपने को ढालते हुए इन्होंने गीतों की रचना की है। अभी हाल ही में इन्हें अखिलभारतीय भाषा साहित्य सम्मेलन के सरस्वती सम्मान से अलंकृत किया गया  है। सोनजुही उतरी गीतसंग्रह के इस रचनाकार को ग्वालियरमेले में अखिलभारतीय सम्मान देकर गालवऋषि की नगरी ने इनके प्रति अपना सम्मान प्रकट किया है। भारत की राजधानी दिल्ली में भी आपके कई सम्मान के कार्यक्रम आयोजित किए जा चुके हैं।

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