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Thursday, June 2, 2011

जयलोकमंगल के नए सदस्य

कवि घनश्याम वसिष्ठ बने जयलोकमंगल के नए सदस्य
जयलोकमंगल के परिवार में एक और सुखद इजाफा हुआ है। हमारे बीच एक बेहतरीन कवि  घनश्याम वसिष्ठ जयलोकमंगल के नए सदस्य बन गए हैं। वे पहले से ही फेसबुक पर लिख रहे थे। और वहां जयलोकमंगल के बड़े ही सक्रिय सदस्य रहे हैं। और हैं। हम उनका स्वागत करते हैं और उम्मीद करते हैं कि उनकी रचनाएं हमें रोज़ पढ़ने को मिलेंगी।

Wednesday, March 2, 2011

क़ज़ी तनवीर बने नए सदस्य


जयलोकमंगल परिवार में आज एक नए सदस्य का इजाफा हुआ है। ये है जनाब क़जी तनवीर। दम इनका स्वागत इनकी ही पंक्तियों से करते हैं-
महक महुए की बिखरी है फजाओं में
बदन सचमुच नशीले हो रहे हैं
सुना है इस बरस उन गोरियों के
अधिकतर हाथ पीले हो रहे हैं

Monday, January 24, 2011

अपने बदन पर लाठियां खाईं

नई सदस्यता-
मैं स्वतंत्रता सैनानी ग्वालियर निवासी 80 वर्षीय कवि
जगदीश परमार जिसने अंग्रेजों को इस देश से भगाने के लिए अपने बदन पर लाठियां खाईं और आजतक कलम से सामाजिक जागरण की लड़ाई लड़ता रहा पुत्रवत प्रख्यात कवि पंडित सुरेश नीरव की असीम अनुकंपा से आज से जयलोकमंगल का विधिवत सदस्य बन गया हूं। मैं सुरेश नीरव को अपनी लेखनी का समर्थ उत्तराधिकारी मानता हूं और उनके हर अनुष्ठान में पूरी शिद्दत के साथ सदैन साथ हूं। जयलोकमंगल को ग्वालियर में मैं पढ़ता रहा हूं अब अपनी राय भी दे सकूंगा। सभी साथियों को मेरे सलाम..
जगदीश परमारमोबाइल -9229176901 ग्वालियर