कवि घनश्याम वसिष्ठ बने जयलोकमंगल के नए सदस्य
जयलोकमंगल के परिवार में एक और सुखद इजाफा हुआ है। हमारे बीच एक बेहतरीन कवि घनश्याम वसिष्ठ जयलोकमंगल के नए सदस्य बन गए हैं। वे पहले से ही फेसबुक पर लिख रहे थे। और वहां जयलोकमंगल के बड़े ही सक्रिय सदस्य रहे हैं। और हैं। हम उनका स्वागत करते हैं और उम्मीद करते हैं कि उनकी रचनाएं हमें रोज़ पढ़ने को मिलेंगी।यह मंच आपका है आप ही इसकी गरिमा को बनाएंगे। किसी भी विवाद के जिम्मेदार भी आप होंगे, हम नहीं। बहरहाल विवाद की नौबत आने ही न दैं। अपने विचारों को ईमानदारी से आप अपने अपनों तक पहुंचाए और मस्त हो जाएं हमारी यही मंगल कामनाएं...
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Thursday, June 2, 2011
Wednesday, March 2, 2011
Monday, January 24, 2011
अपने बदन पर लाठियां खाईं
नई सदस्यता-मैं स्वतंत्रता सैनानी ग्वालियर निवासी 80 वर्षीय कवि जगदीश परमार जिसने अंग्रेजों को इस देश से भगाने के लिए अपने बदन पर लाठियां खाईं और आजतक कलम से सामाजिक जागरण की लड़ाई लड़ता रहा पुत्रवत प्रख्यात कवि पंडित सुरेश नीरव की असीम अनुकंपा से आज से जयलोकमंगल का विधिवत सदस्य बन गया हूं। मैं सुरेश नीरव को अपनी लेखनी का समर्थ उत्तराधिकारी मानता हूं और उनके हर अनुष्ठान में पूरी शिद्दत के साथ सदैन साथ हूं। जयलोकमंगल को ग्वालियर में मैं पढ़ता रहा हूं अब अपनी राय भी दे सकूंगा। सभी साथियों को मेरे सलाम..
जगदीश परमारमोबाइल -9229176901 ग्वालियर
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