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Friday, June 3, 2011

बी.एल. गौड़ को साहित्यश्री सम्मान मिलने पर

बी.एल. गौड़ को साहित्यश्री सम्मान मिलने पर शीला डोगरे ने भेजी कविता
एक साये की खोज तो है मुझको भी,
शायद मिलजयें वह यही कही ...,
एक साया है ठहरा-ठहरा ,
धुप मे जल हो गया है गहरा.
साया मुझमे ,मै साये मे ...
हम दोनों एक-दूजे के साथी.
साथ हमारा भरी दोपहरी ,
छाव की तो वह लांघे ना देहरी
. मगरूर बन अकड़ता जाये,
ढलती शाम सा बढ़ता जाये.
वह बस मुझसे ही बतियाये ,
फिर भी लगता है पराया ,
हर बार उसको न्य ही पाया .....|||||||

२० मई २०११ ९:४४ अपराह्न को, Praveen Arya <