ब्लागजगत में कोई किसी का इंतजार नही कर रहा है और यहां शिष्टाचार या औपचारिकता मे कुछ कहना लिखना व्यर्थ है जानकर ग्यानवर्धन हुआ।एक काफी पहले लिखा मुक्तक याद आ रहा है-------
हर चेहरे के पीछे हमने एक नया चेहरा देखा
हमने यहां अमीना के संग बूढे का सेहरा देखा
इस दुनिया की एक खासियत यारों हमने खोज ही ली
जो जितने ऊंचे बैठा है वह उतना बहरा देखा
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