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Monday, December 14, 2009

आदमी, आदमी को क्या देगा...

आदमी, आदमी को क्या देगा

जो भी देगा वही खुदा देगा

मेरा कातिल ही मेरा मुंसिफ है

क्या मेरे हक में फ़ैसला देगा

जिन्दगी को करीब से देखो

इसका चेहरा तुम्हें रुला देगा

हमसे पूछो दोस्ती का सिला

दुश्मनों का भी दिल हिला देगा

इश्क का ज़हर पी लिया जिसने

मसीहा भी क्या उसे दवा देगा

(सुदर्शन फकीर )

प्रस्तुति : अनिल (१४.१२.२००९ ३-०० अप-)

1 comment:

श्यामल सुमन said...

मेरा कातिल ही मेरा मुंसिफ है
क्या मेरे हक में फ़ैसला देगा

बहुत खूब अनिल जी। देखिये एक तात्कालिक कोशिश मेरी भी-

लगायी आग जिसने वो अपना है।
डर होता कि वही आकर हवा देगा।।

सादर
श्यामल सुमन
09955373288
www.manoramsuman.blogspot.com