ग़ज़ल ग़ज़ल ग़ज़ल ग़ज़ल ग़ज़ल ग़ज़ल
दिल ने तेरे पुकारा और हम चले थे आए
ये भी ना दिल ने सोचा कल होगा क्या नतीजा !
कल की किसे पड़ी थी मैं पल में जी रही थी
मेरी साँसे तेरी साँसों के साथ ही जुड़ी थी |
तुमसे लगन लगी थी कुछ सूझता नहीं था
जो कुछ भी देखता दिल साया तेरा वहीं था |
दिल का ये हाय मसला कोई जानता न हीं है
वही जानेगा इसे तो जिसने हो दिल लगाया |
कहती है दुनिया मुझको मैं पागल हो गई हूँ
कहती हूँ खुद की खुद से औ सुनती बयान अपना |
मुझे कुछ खबर नहीं है क्या हो र हा यहाँ है
ये भी ना दिल ने सोचा कल होगा क्या नतीजा !
कल की किसे पड़ी थी मैं पल में
मेरी साँसे तेरी साँसों के साथ
तुमसे लगन लगी थी कुछ सूझता नहीं था
जो कुछ भी देखता दिल साया तेरा
दिल का ये हाय मसला कोई जानता न
वही जानेगा इसे तो जिसने हो दिल
कहती है दुनिया मुझको मैं पागल
कहती हूँ खुद की खुद से औ सुनती
मुझे कुछ खबर नहीं है क्या हो र
एहसास बस है इतना कि दिल में तू बसा है |
वेदना उपाध्याय
शाहजहांपुर
No comments:
Post a Comment