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Sunday, December 20, 2009

ये भी ना दिल ने सोचा कल होगा क्या नतीजा

 ग़ज़ल  ग़ज़ल ग़ज़ल ग़ज़ल ग़ज़ल ग़ज़ल

दिल ने तेरे पुकारा और हम चले थे आए 
ये भी ना दिल ने सोचा कल होगा क्या नतीजा !

कल की किसे पड़ी थी मैं पल में जी रही थी 
मेरी साँसे तेरी साँसों के साथ ही जुड़ी थी |

तुमसे लगन लगी थी कुछ सूझता नहीं था 
जो कुछ भी देखता  दिल साया तेरा वहीं था |

दिल का ये हाय मसला कोई जानता हीं है 
वही जानेगा इसे तो जिसने हो दिल लगाया |

कहती है दुनिया मुझको मैं पागल हो गई हूँ 
कहती हूँ खुद की खुद से  सुनती बयान अपना |

मुझे कुछ खबर नहीं है क्या हो हा यहाँ है

एहसास बस है इतना कि दिल में तू बसा है |
वेदना उपाध्याय
शाहजहांपुर 

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