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Sunday, December 20, 2009

कहीं भी फिट कर दो काम चोखा करते हैं


हजामत
प्रकाश चंद
आज हमारे सेलून में हजामत की हॉट सीट पर बैठे हैं जनाब प्रकाश चंद रेडियोवाले। हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले में फर्स्ट अप्रैल के ठीक एक दिन बाद (2-5-1953) अवतरित हुए प्रकाश चंद जी जब इक्कीस साल के थे तभी से आकाश चारी हो गए थे। यानी पांव भले ही ज़मीन पर हों मगर आंखें और कान आकाशवाणी के हो गए मतलब यह कि सन 1974 से जनाब आकाशवाणी की सेवा में जुटे हुए हैं और जब तक सठिया नहीं जांएगे  (मतलब कि जब तक साठ साल के नहीं हो जाते) तब तक सेवा में ही रहेंगे। प्रकाश चंद का यदि उर्दू में इनुवाद किया जाए तो तर्जुमा होता है बशीर बद्र। यानी कि एक बहुत मशहूर शायर का नाम। अब नाम की बात चली है तो प्रकाश चंद जी नाम के पीछे नहीं भागते बल्कि तमाम नाम वाले इनके आसपास मंडराते रहते हैं। तमाम लोगों को प्रकाशजी हंसते-हंसाते  प्रकाश में ले आते हैं। कवि गोष्ठी में भी हाथ रमा करते रहते हैं। प्रकाशजी राष्ट्रीय प्रसारण के मल्टीपर्पज मैन हैं। उन्हें कहीं भी फिट कर दो काम चोखा करते हैं। इनकी इसी फितरत के कारण इनकी मांग अभी तक बनी हुई है। भैया जी जब किसी कलाकार से खुश होते हैं तो उसका चैक तुरंत हाथों हाथ पकड़ा देते हैं और नाराज हो जाएं तो उसे चैक लेने के लिए काफी पापड़ भी बिलवा देते हैं।  इनके तिलस्म  की काट आसान नहीं होती है। दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक प्रकाश चंद जी तुसी ग्रेट हो। और इतने ग्रेट हो कि कई ग्रेट आप से मिलते ही बन जाते हैं। जैसे कि मैं बन गया। आपकी हजामत बनाते हुए मुझे बड़ी होम्योपेथिक खुशी हो रही है। आप को मेरे उस्तरे का सलाम..जै राम जी की
पं. सुरेश नीरव

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