भूमध्य सागर के तट पर बसी पीज़ा और पास्ता की जन्म स्थली-इटली। बर्फ़,खुशबू फूल और अंगूरी (रेडवाइन) के लिए मशहूर। कला,संस्कृति और रोमन स्भ्यता की तमाम हलचलों का गवाह रहा इटली कभी इटलस नाम के राजा की राजधानी थी। कहते हैं कि इस इटली की राजधानी रोम को रोमुलस और रेमस ने मिलकर बसाया था। इसी इटली की भूमि में जन्मे थे - प्लेटो,अरस्तु,युक्लिड,टॉलमी और मेकियाविली-जैसे दार्शनिक और पोलिजिआनो जैसे कवि जो सास्कृतिक पुनर्जागरण के कारण बने। फिर इटली ने झेला प्लेग का कहर। एक पूरी-की-पूरी सभ्यता प्लेग ने लील ली।सोलहवीं शताब्दी का बिखरा यह देश फिर जाकर एक जुट होने की राह पर चला जब एलसेंडरो मेजिनी ने लिखी द बेट्रोथेट। इस पुस्तक ने सपना दिया एकीकृत इटली का। इस सपने को साकार किया गैरीबाल्डी जैसे योद्धा ने। इटली ने फिर झेला मुसौलिनी के फासीवाद को। और फासीवाद के चलते द्वितीय विश्वयुद्ध की बमबारी से एक बार फिर तबाह हुआ इटली। रातभर बादलों से आंख मिचौनी करता हुआ एक जीते हुए खिलाड़ी की तरह विमान रोम की सर्द ज़मीन पर जब उतरा तो मुझे एक अजीब-सा रोमांच हुआ। प्लेन से बाहर निकलते ही एक सर्द-मुलायम बर्फ की रेशमी बयार तपाक से मुझसे लिपट गई। कोई शक नहीं रहा कि मैं रोम में नहीं हूं। बाहर तापक्रम-5 डिग्री सेल्सीयस था। फर और चमड़े के लिबासों में दुबके टोपी और आइसबूट पहने लोग तेज़ी से अपनी कारों की ओर बढ़ रहे थे। मैं भी फुर्ती के साथ अपनी कार के वातानुकूलित आगोश में जा दुबका। यहां का एअरपोर्ट शहर से 26 किलोमीटर की दूरी पर है। मोनालीसा-जैसी विश्व विख्यात कलाकृति बनानेवाले लिओनार्डो डा विंची के नाम से है यह एअरपोर्ट। पैंतालीस मिनट बाद मैं रोम शहर में था। सम्राट अगस्ट के वैभव की निशानी रोम में। यहीं से कभी पोप की तूती पूरे यूरोप में बोलती थी। आज पोप की हुकूमत सिर्फ वेटेकन सिटी तक ही सिमटकर रह गई है। सन 1929 में इटली सरकार ने इसे एक स्वतंत्र राज्य का दर्जा दिया है। सेंटपीटर बेसेलिका यहां का मुख्य चर्च है। सरकारी राजस्व और पर्यटन पर ही रोम की अर्थ व्यवस्था टिकी है। सड़क और रेल के जरिए रोम लगभग पूरे यूरोप से जुड़ा है। आसमान से बरसती बर्फ और सड़कों और खेतों में फैली बर्फ़ की साफ-शफ्फाफ चादर। लगता है पूरा रोम ही बर्फ के पार्लर से निकलकर आया हो। आज का रोम दो भागों में बंटा देखा जा सकता है-ऑरेलियन वॉल के भीतर सिमटा पुराना रोम और सबर्ब्स में तेज़ी से फैलता नया रोम। भव्य इमारतों.चर्चों,मेहराबों,दरवाज़ों,प्रेक्षाग्रहों और ऑपेराओं से सजा-धजा रोम अपने दामन में साहित्य,कला,संस्कृति,संगीत और रचनात्मक कला की अकूत संपदा समोए हुए है। ईसा से 80 साल पहने बना कोलोज़ियम आज भी अपनी गौरव गाथा सुना रहा है। यहां कभी कुश्तियां हुआ करती थीं। चौथी शताब्दी में बना सेंट जॉन लिटेन का चर्च और सम्राट मार्कस ऑरेलिअस की ब्राज़ मूर्ति से सजा-धजा मार्कस स्क्वायर भी बेहद खूबसूरत है। ऑपेरा इटली की जान है और सन 1903 में बना विश्वविद्यालय इटली की पहचान है। सड़कों के बीच सुरंगें बहुत हैं लगता है जैसे द्वितीय विश्वयुद्ध की बमबारी के डर से सहमी सड़कें आज भी सुरंगों में घड़ी-घड़ी दुबक जाती हैं। अपने को बचाने के लिए।
समुद्र में तैरता एक खूबसूरत शहरः वेनिस
रोम को बाद हमारा अगला पड़ाव था- वेनिस। समुद्र में तैरता एक खूबसूरत शहर। छोटी-छोटी नावें जिन्हें गंडोला कहते हैं वेनिस की पहचान हैं। वेनिस में दो एअरपोर्ट हैं-मॉर्कोपोलो एअरपोर्ट और ट्रेवीनो एअरपोर्ट। समुद्र में जो ज्वार आता है उसे यहां एक्वा एल्टा कहते हैं। यह एक्वा एल्टा वेनिस के लिए काल है। इसकी ऊंचाई दिन-ब-दिन बढ़ रही है। ग्लोबल वॉर्मिंग भी इसका एक काऱण है। जवार की चपेच में जी शहर आता है तो यहां केमकाने का एक तल पूरी ही डूब जाता है मगर फिर भी लोगों के कार्य-कलाप नहीं रुकते। ज्वेलरी, क्रिस्टल,लेदर और कांच के खिलौनों के अलावा फैशन डिजायनरों का स्वर्ग है वेनिस। यहां जो ङी जाता है लौचने पर उसके वॉरड्रोब में पर्फ्यूम और लेटेस्ट डिजायन के कपड़ों में इजाफा हो ही जाता है। एड्रीयोटिक सागर के तट पर हसे इस शहर में एक बव्य इमारत है न्यू प्रिजन। यह तीन मंजिली जेल है। राजनैतिक कैदियों के अलावा खूंखार अपराधियों को यहां रखा जाता था। अंग्रेजी कवि लॉर्ड बायरन ने यहां बैठकर कविता लिखी थी- THE SIGHS। यानी आहें। और शेक्सपीयर ने इस शहर को केन्द्र में रखकर नाटक लिखा था मर्चेंट ऑफ वेनिस। जैतून के पेड़ और जैतून का तेल इनकी खास पहचान है। यहां जो बसें चलती हैं उनमें कंडक्टर नहीं होते इसलिए टिकट भी बसों में नहीं मिलते। रेल और बस के टिकट बार और किताबों की दूकान पर मिलते हैं। डोजेस पैलेस यहां का मुख्य आकर्षण है। यहां अब म्यूजियम है। सान मार्को की छतों पर सोने से बनी कला-कृतियां हैं। ग्रांड केनाल पर बना मार्को स्क्वायर भी देखने लायक है। पूरे इटली में ट्रेफिक दायीं तरफ से चलता है यह भी इटली की खासियत है।
व्यवसाय और संस्कृति का केन्द्रःमिलान
वेनिस से मिलान 200कि.मी. है। यह िटली का प्रमुख व्यावसायिक और सांस्कृतिक केन्द्र है। यहां बस के अलावा ट्राम भी चलती हैं। मेजिनी यहीं पैदा हुए थे। अंग्रेजी कवि रॉबर्ट ब्राअनिंग ने यहां प्रवासकर बहुत-सी कविताएं लिखीं और उनकी पत्नी एलीजाबेथ ब्राउन का यहीं देहांत हुआ था। आज से 200 साल पहले भारत का कोई राजकुमार याया था और फिर वापस नहीं जा पाया था। उसको यहीं दफनाया गया। उसकी याद में इंडियानो ओवरब्रिद आज बी बना है। द्वितीय विश्वटुद्ध में पूरी तरह ताह हो चुका मिलान आज इटली की शान है। पदाना घाटी में बसे मिलान में सात खंडों से बना एक किला है- केसिलो फॉर जेसिको। इसे 1573 में विक्टर इम्योनो ने बनाया था। गैरीबाल्डी के नाम से यहां चौक है जहांब्राज की उनकी मूर्ति लगाए जाने का काम भी चल रहा है। इटली का यह प्रमुख औद्यौगिक और सांस्कृतिक केन्द्र है। दुनिया की सबसे ज्यादा बैंक मिलान में ही हैं। यहां पच्चीस थियोटर हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि यहां लोग रहते बहुत कम हैं। रोज़ आउटर स्कर्ट में रहनेवाले लोग यहां ाते हैं और काम करके चले जाते हैं। यहां विश्व प्रसिद्ध स्टेडियम संससीरिया स्टेडियम है जिसमें 85 हज़ार दर्शक एक साथ बैठ सकते हैं। मिलान की फुटबॉल टीम विश्व प्रसिद्ध है। लोगों ने बताया कि एक खिलाड़ी ने यहां की टीम में शामिल होने के लिए 16 करोड़ यूरो खर्च किए। टीम में शामिल होने के लिए यहां खिलाड़ियों की बोली लगती है। यहां कारें बहुत बनती हैं। इसलिे कार पार्किंग यहां की सबसे बड़ी समस्या है। शहर के बोचोबीच 16वीं शताब्दी का बना पर्टा-बल्टा गेट है। इसके पीछे लगभग 20 हजार चीनी रहते हैं। यह यहां का चाइना टाउन है। आगो 16वीं शताब्दी काबना एक च्च है-फामे एडीज़। यह लेटिन शब्द है जिसका मतलब है- दुःख का संसार। टहां दो रेल्वे स्टेशन हैं-गौरीबाल्डी लेल्वे स्टेशन और सेंट्रल रेल्वे स्टेशन। यह 1931 में मुसौलिनी ने बनवाया था। यहां से रोज़ 500 ट्रेन्स पूरे यूरोप के लिए रवाना होती हैं। खासकर स्विटजरलैंड,इस्तानबुल,वेनिश और ट्रीनिन के लिए। 75 किलोमीटर तक यहां अंडरग्राउंड रेल्वे है। यहां की गगनचुंबी इमारतों की छतों पर रूफगार्डन और स्वीमिंगपूल बने हुए हैं। आगे रिपब्लिक स्क्वायर पर दो विशाल होटले हैं। ओक सड़क का नाम गार्डन रोड है। निजी प्रयासों से लोगों ने यहां बड़े-बड़े पार्क बनवाए हैं। लंबार्डी मिलान की राजधानी है। आर्मीनी बिल्डिंग कलाकारों और फैशन डिजायनरों का केन्द्र है। इसके आगे है-बरेरा स्ट्रीट। कभी यहां बरेरा पेंटिंर्स के मशहूर कलाकार रहा करते थे,अब धनवान लोग रहते हैं। आगे बढ़ते हैं तो मिलता है स्कॉला अपेरा हाउस। इसी के नाम से स्कॉला स्क्वेयर भी है। इटली को मूर्तकला में शोहरत दिलानेवाले माइकल एंजिलो के नाम सो यहां माइकल एंजिलो स्क्वायर भी है।
फूलों का नगरःफ्लोरेंस
फ्लोरेंस प्रतीक है फ्लावर का। वर्जिन मैरी के सेंटा मेरिया चर्च और कुदरती खूबसूरती के लिए मशहूर फ्लोरेंस। कच्ची पहाड़ियों पर बसा एक सुंदर नगर।। मेडिसी पैलेस पहाड़ी पर बना एक खूबसूरत महल है। डेविड की मुर्तियों और विशाल चर्चों से सज्जित यह खूबसूरत शहर इतिहास लपेटे है अपने-आप में। फ्लोरेंस यूनिवर्सिटी दुनिया में अपनी एक अलग पहचान रखती है। खासकर समाज विज्ञान के लिए। यहां की पैर्लन पेंटिग्स में ग्रीक की तमाम लोककथाएं विश्राम करती हैं।
पं. सुरेश नीरव
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