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Tuesday, February 9, 2010

इब्नेबतूता और गुलजार

इब्नेबतूता और गुलजार ः
आप सोच रहे होंगे कि दोनों में क्या संबंध है तो इस पर आपत्ति जताई है प्रसिद्ध कवि सर्वेश्वरदयाल सक्सेना की बेटी ने
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फिल्म इश्किया का गाना इब्नेबतूता भले ही लोगों को पसंद आ रहा है, लेकिन गीतकार गुलजार के इस गीत पर कवि सर्वेश्वर दयाल सक्सेना के परिवार वाले बेहद आहत हैं, क्योंकि उनकी कविता से प्रेरित होकर लिखे गए इस गाने में गुलजार ने कहीं भी इस दिवंगत कवि को श्रेय नहीं दिया है। सर्वेश्वर दयाल सक्सेना की बेटी विभा सक्सेना का कहना है कि मेरे पिता ने इब्ने बतूता पर लिखी कविता लिखी थी, लेकिन गुलजार साहब ने इसमें थोड़े बदलाव करते हुए यह गाना लिख मारा। हमें दुःख इस बात का है कि कहीं भी उन्हें श्रेय नहीं दिया गया या ऐसा नहीं बताया गया कि यह गाना सर्वेश्वर दयाल सक्सेना की कविता इब्ने बतूता से प्रेरित है।

उन्होंने कहा, गुलजार साहब खुद एक कवि हैं और अगर वह गाने की पंक्तियाँ कहीं से उतारते हैं तो उसे हमेशा श्रेय देते हैं। उनकी गरिमा इसी में होगी कि वे मेरे पिताजी को श्रेय दें क्योंकि मेरे पिताजी अब इस दुनिया में नहीं हैं। विभा सक्सेना का कहना था कि "हमारा परिवार और सभी साहित्यकार यही चाहते हैं कि सिर्फ मेरे पिताजी की कविता को श्रेय दिया जाए। सभी साहित्यकारों को बुरा लग रहा है कि कवि को इस गाने से अलग रखा गया है जबकि गाने की शुरूआती पंक्तियाँ वही है और सिर्फ अंदर ही बदलाव किए गए हैं।

उनकी दूसरी बेटी शुभा कहती है कि 1976/77 की सर्दियों में उन्हें पहली बार स्कूल जाना था और पिता नए जूते और कपड़े लेकर आए थे। घर से स्कूल तक तेज ठंडी हवा और कोहरे के बीच वे रास्ते भर गुनगुनाते रहे। उन्होंने बताया कि उस कविता की पूरी पंक्तियाँ उन्हें आज भी याद हैं। ‘बतूता का जूता’ शीर्षक से यह पुस्तक 1971 में प्रकाशित हुई। उनेहोंने यह किताब उनके व उनकी बहन विभा के नाम समर्पित की थी।
प्रस्तुतिः डॉ.मधु चतुर्वेदी
पुनश्चः पं. सुरेश नीरव की इटली यात्रा के संस्मरण अच्छे लगे। साथ ही उनकी हास्य ग़ज़ल के अलावा अनिल और मकबूलजी की ग़ज़ले भी अच्छी लगीं।

1 comment:

रोमेंद्र सागर said...

इसी विषय पर कुछ गुना है.... फुर्सत हो तो नज़र मार लें ....

http://vikshubdha.blogspot.com/2010/02/blog-post_10.html