दाग दुनिया ने दिए जख्म ज़माने से मिले
हमको ये तोहफे तुम्हें दोस्त बनाने से मिले
हम तरसते ही तरसते ही तरसते ही रहे
वो फलाने से फलाने से फलाने से मिले
खुद से मिल जाते तो चाहत का भरम रह जाता
क्या मिले आप जो लोगों के मिलाने से मिले
कैसे मानें कि उन्हें भूल गया तू ए दोस्त
उन के ख़त आज हमें तेरे सरहाने से मिले
प्रस्तुति: अनिल (१९.०३.२०१० सायं ४.०० बजे )
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