हास्य की बहुआयामी ताकत से भला कौन परिचित नहीं है। हास्य हमारा मनोरंजन करता है, हमें खुशी देता है और सबसे महत्वपूर्ण बात ये है कि हास्य एक कुदरती दवा भी है जोकि दर्द,घबड़ाह़ट,और मानसिक तनाव से हमें हंसी-हंसी में ही छुटकारा दिला देती है। वैज्ञानिकों ने हास्य को एक प्रभावी एंटीएज कारक भी माना है। एक हंसी में न जाने कितने गुण छिपे हुए हैं। हमारी जिंदगी और कामकाजी जिंदगी दोनों के बीच हास्य एक संतुलन बनाए रखता है। ये बात दीगर है कि हम आज हंसी से दिन-ब-दिन दूर होते जा रहे हैं। केवल बच्चे ही है जो आज हंसी और मजे-मौज की ज़िंदगी जी पा रहे हैं। एक बच्चा दिन में कमोबेश 400 बार हंसता है जबकि एक प्रौढ़ व्यक्ति दिन में चाहे वह आफिस में हो या घर में वह 20 बार से भी कम हंसता है। अभी हाल के सर्वेक्षण यह बताते हैं कि 64 प्रतिशत प्रौढ़ घर में बीस बार से कम घर में और 72 प्रतिशत लोग बीस बार से भी कर अपने कार्यस्थल पर हंसते हैं। अंतर्राष्ट्रीय ह्यूमर कांग्रेस के मुताबिक विश्व स्तर पर 1950 के बाद 66-82 प्रतिशत की गिरावट हंसी में देखी गई है। 1950 तक औसत आदमी औसतन 18 मिनट रोज़ हंसता था आज वह आदमी भाग्यशाली माना जाएगा जो 4-6 मिनट भी रोज हंस पाता हो। हां वैज्ञानिकों ने यह जरूर माना है कि भातचीत के दौरान अचानक हंसी के फूट पड़ने की फितरत आदमी ने आज भी बरकरार रखी है। और एक आदमी की मौजूदगी में व्यक्ति 6 बार ज्यादा हंसता है और समूह में वह अपनी आदत से तीसगुणा ज्यादा हंसता है। यह तथ्य भी सामने आया है कि आप किताब,नेट या एसएसएस के जरिए लतीफे पढ़कर हंस तो सकते हैं मगर पेटपकड़कर हंसने की बारी समूह में उपजे हास्य से ही होती है। आज इलेक्ट्रोनिक माध्यम ने बटन दबाते ही ङंसने के साधन हमें मुहैया करा दिए हैं टीवी,वीडियो,कंप्यूटर और नेट मगर पहले के समय में आदमी कमरे में नहीं हंसता था बव्कि इसके लिए घर से बाहर जाया करता था। और हंसता था और हंसाता भी था। यानी हंसी उस समय सामाजिकता का एक माध्यम थी आज उन घरों में जहां पति-पत्नी काम करते हैं उन्हें घर में ङी साथ-,साथ हंसने का मौका नहीं मिलता और बाहर जाकर हंसने का वह सोच भी नहीं सकते। कार्यस्थल पर बढ़ती प्रतियोगिता ने हंसी को बिल्कुल खत्म कर दिया है। भर आदमी कम समय में ज्यादा से ज्यादा देकर अपनी श्रेष्ठता बरकरार रखने में जुटा है उसे हंसने का समय कहां है।
हास्य-कोट्स-
भविष्य एक उम्मीद है क्योकि ईश्वर में सेंस ऑफ ह्यूमर होता है और बम ईश्वर से और ईश्वर हमसे मजाक करता रहता है।
-बिल कऑस्बी ( फिल्म अभिनेता)
| | हास्य मुष्य द्रारा ईजाद किया सबसे बड़ा वरदान है। | ( | मा | र्कट्वेन | ) | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | मार्क ट्वेन |
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| “”आदमी को सबसे ज्यादा हास्य की जरूरत तब पड़ती है जब वह किसी मूर्ख से बात करता है। |
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| चीनी कहावत |
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| हास्य सबसे कम समय में पैदा होनेवाली फसल है। इसके लहलहाते ही उदासी की खरपतवार खत्म हो जाती है और एक खुशनुमा नई सुबह धरती पर उतर आती है। | |
| आप दुखद परिस्थितयों को खुशी में बदल सकते हैं यदि आपको गरीबी में हंसना आता हो तो। | |
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