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Tuesday, October 19, 2010

लज्जा स्त्री का गहना है ........................

    मुल्ला  नसरुद्दीन  हाँफते  हुए  थाने  पहुँचा  और  थानेदार  से  शिकायत 
    करने  लगा --"थानेदार  जी  मेरे  घर  के  पीछे  एक  तालाब  है , वहां
   लड़कियां  नंगी  नहाती  रहती  है ! मेरा  तो  जीना  दूभर  हो  गया  है !
   लज्जा  तो  स्त्री  का  गहना  है , कुछ  कीजीये  !
   थानेदार  ने कहा --"ठीक  है  आप  जाएँ , मैं अभी  सिपाही  भेज कर 
   उनका  वहां  नहाना  बंद  कराये  देता  हूँ !"
                  दूसरे  दिन  फिर  मुल्ला  नसरुद्दीन  थाने  पहुँचा  और  वही
   शिकायत  की !
   थानेदार  ने  कहा --" अब  तो  वो  लड़कियां  दूसरे  तालाब  मैं  नहाने  
   जाने  लगी  हैं  , वह  तो  तुम्हारे  घर  से  बहुत  दूर  है ?"
   नसरुद्दीन  बोला  -" हाँ  वो तो  ठीक  है  साब , लेकिन  मैं  बाजार  से 
   दूरबीन  जो  ले  आया  हूँ , बिल्कुल  साफ़  नज़र  आती  हैं !"
                ..........................डाक्टर  साहेब  आप  क्यों  दूरबीन  खरीद
   लाये  ,नेपाल  के  राजघराने  को  देखने  दिखाने  के  लिए  ?
   संस्कारित  पुरुष  अपनी  खिड़कियाँ  बंद  कर  लेते  हैं  !
               क्या  सारे  गहने  स्त्रियों  के  लिए  हैं ? और  पुरुष  का  काम 
   मात्र  नथ  उतारना  है ?
               नेपाल  के  राजघराने  के  साथ  दरजी  ने  गुस्ताखी  की  या 
   प्रथ्वी  के  गुरुत्वाकर्सन  कारण  रहा  हो , ये  विवाद  का  विषय  नहीं !
   विषय  है  कि  पुरुष  ने  क्या  किया ?
            एक  ने  उन  लम्हों  को  केमरे  मैं  क़ैद  किया  और  दूसरे  ने 
   इंटरनेटी  इश्तहार  बना  दिया !
    ये  दुरियोध्नी  मानसिकता  है !
    कुंठाएं  ऐसे  भी  निकाली  जाती  हैं !
                          ननुआ  दूधवाला  रेलगाड़ी  के  टायलट  में  अश्लील 
   चित्रकारी  करके  हल्का  हो  जाता  है ! और  गंगूराम  चपरासी  लिफ्ट 
   कि  दीवारों  पर  गाहे -बगाहे  प्रोनोग्राफ़ी  कर  लेता  है !
        लेकिन  एक  पुरुष  जो  डॉक्टर  है , डिग्री  भी  बड़ी  है  ,उसकी  सोच   
    का आयाम  भी  बड़ा  है , अतः  माध्यम  भी  बड़ा  ही  चुना  है .........
  " इन्टरनेट " !
   हैसियत  बड़ी  , अपराध  बड़ा !
   डॉक्टर  साहेब  और  भी  बहुत  कुछ  है  नारी के पास  जिस्म  के  अलावा
   उसे  भी चित्रित  करने  की  कोशिश करें !
          पूर्वाग्रहों  से  ग्रसित  न  हों  और  कभी  नारी  कि  रूह  में  भी  गहरे 
   उतरकर  कर  देखें !
  रूह , जहां  शरीर  अपना  अर्थ  खो  देते  हैं  !
  रूह , जहां  जिस्म  बे-मानी  हो  जाते  हैं !
   और  शुरू  होती  है  एक  आध्यात्मिक  यात्रा , जिस्म  कहीं  बहुत  पीछे 
  रह  जाते  हैं !
   एक  शरीर  के  डॉक्टर  के  लिए  मुश्किल  तो  होगी  ये  यात्रा , लेकिन 
  कोशिश  तो  कि  जा  सकती  है !
   और  अगर  गहरे  उतर  गए  तो  कोशिश  करने  के  पर  भी  जिस्म  न
  देख  पाओगे  ! 
   मेरे  गुरु  के  आशीर्वाद  स्वीकारें  !
                                                                एक  रसोइया 
                                     yatharth  meditation  international        
                                       dharmshala ( h.p.) 09418841999           

 


  

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