जयलोकमंगल...
आज कई दिनों बाद ब्लाग देखने का मौका मिला। बहुत सारी सामग्री देखने को मिली। श्री सुरेश नीरवजी ने एक अच्छा प्रश्न उठाया है। आखिर धर्म और अँधविश्वास में कुछ तो फर्क होना ही चाहिए। धर्म दृष्टि देता है और अंधविश्वास अंधत्व। मंगलवार के बहाने चिंतन का एक मुद्दा हमारे सामने रखकर उन्होंने हमारी जड़ता को तोड़ने की कोशिश की है। हो सकता है कि जो नियम बने हैं उनके पीछे कोई वैज्ञानिक आधार हो जो हमें नहीं पता है। अगर है तो उसे भी सामने आना चाहिए ताकि हम नई पीढी को इस बारे में समझा सकें।
दया निर्दोषी (कवयित्री)
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