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Saturday, November 27, 2010

भीतर के आलोक से आलोकित हों


श्री प्रशांत योगीजी
आप आत्मा के दिव्यप्रकाश से आलोकित हों और समाज को भी आलोकित करें। तथागत बुद्ध के शब्दों में..
अप्प दीपोभव..
जन्मदीन की ढेरों शुभकामनाएं..
डाक्टर प्रेम लता नीलम
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