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Monday, February 7, 2011

बुलंदियों को छूता ब्लॉग


आज मैंने देखा कि जयलोकमंगल ब्लॉग अपनी गगनचुम्बी बुलंदियों पर परचम फहरा रहा है। हजारों लोग इस पावन आयोजन का आनंद ले रहे हैं। आदरणीय नीरवजी ने इस धुरी से सभी को जोड़ दिया है। कितने पाठक, दर्शक और लेखक हैं जो अपनी अनवरतता को संजोये हुए हैं। इसके लिए मैं श्री नीरवजी को बधाई और धन्यवाद देता हूँ जो उन्होंने असीमता के सागर में शब्दों के मोती पिरो दिए हैंऔर यह लड़ी अपनी जीवन्तता को जी रही है। सर्व श्री महर्षि पंडित सुरेश नीरवजी का अप्रितम लेखन सभी को मोह लेता है। जगदीश परमारजी की महती काव्यधारा, डा० मधु चतुर्वेदीजी की महकती गजल, अरविन्द पथिक जी की ओजस्वी वाणी, मानवजी की मानवीयता, मंजु ऋषिजी की मन से मन को टटोलती कविता, बी एल गौड़जी की ज्ञानवर्धक एवं रस से भरी हुई कविता, प्रशांतयोगीजी की योगप्रेम साधना, ओ चांडालजी की बसंती आलेख, डा० प्रेमलता नीलमजी लुभाती प्रतिक्रिया, मधु मिश्राजी अभूतपूर्व टिपण्णी, मधुलिका सिंहजी का आनंदविभोर करने वाला गीत, विश्वमोहन तिवारीजी के अन्वेश्नात्मक आलेख, नागेद्र जी की मचलती इठलाती कविता, ज्ञानेद्र चतुर्वेदी जी की प्रतिक्रिया, हीरा लाल पाण्डेयजी के संज्ञानवर्धक लेख और प्रलयजी के प्याले में गूंजता हुआ व्यंग्य जय लोकमंगल ब्लॉग जगमगा रहे हैं। इन सभी शब्द प्रेमियों को मैं बधाई ही नहीं बल्कि प्रणाम भी करता हूँ। जय लोकमंगल।
भगवान सिंह हंस
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