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Wednesday, March 23, 2011

शहीद भगत सिंह ,राजरुरू सुखदेव को हमारा शत -शत नमन


 संदर्भः शहीदी बलिदान दिवस-
 सैंकड़ों कुर्बानियां देकर ये नैमत पायी है..
आज शहीदे आजम भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरू के बलिदान का ऐतिहासिक दिन है। इन नौजवानों ने फांसी पर लटक कर आज के ही दिन यानी कि 23 मार्च को ब्रितानिया सरकार को ललकारा था और खुद अपने लहू को जलाकर आजादी की मशाल को रोशन किया था। ये वो नौजवान थे जो 23-24 साल के थे सिर्फ..23-24 साल के। आज इस उम्र के लड़के अपनी गर्लफ्रेंडों को एसएमएस करते और डेटिंग के लिए एक अदद सुरक्षित अंधेरा कोना खोजने में ही खर्च हो रहे हैं। आज देश की अस्मिता से ज्यादा बड़ा सवाल है आरक्षण का। जिन्हें आरक्षण चाहिए उनके हाथों में मशालें हैं सरकारी बसों को जलाने के लिए। रेल की पटरियों पर बैठकर कोरस में नारे लगाने के लिए। जिनको आरक्षण नहीं मिल सकता उनके हाथों में बंदूके हैं, अपना हक मांगने के लिए। उनके दिमागों में बारूदी सुरंगें हैं,सेना के जवानों को उड़ाने के लिए। जो दलित है वह सवर्णों से सदियों के हिसाब चुकाने को आमादा है। सदियों की दुश्मनी आज आमने-सामने हैं। हिंदी जो कभी राष्ट्रभाषा बन के उभरी थी आज बोलियों की टोलियों में घिरकर लहु-लुहान है। और कुछ दलाल हिंदी के नाम पर सरकारी मेहरबानियों के बूते अपने बीवी-बच्चों सहित विदेशों में पिकनिक मना रहे हैं। और सरकारी दुकानों के मुनीम बनकर अपना और अपनी चंडाल चौकड़ी को नाजायज लाभ देकर अपने बेशर्म-पराक्रम को परोपकार सिद्ध करने में लगे हुए हैं। भ्रष्ट तंत्र में भरपेट माल उड़ाकर ये केंचुए अब शेषनाग बन रहे हैं। गधे पंजीरी खा रहे हैं। मैं सोचता हूं कि अगर आज हमारे ये शहीद जिंदा होते तो उन पर क्या गुजरती। और-तो-और कुछ दुकानदार किस्म के लोग इन शहीदों के नाम पर पशुमेला लगाकर कुछ लतीफेबाजों और और कुछ बड़बोले कवियों को बुलाकर नौटंकी आयोजित करके अपनी जेब भी भर लेते हैं। जिन मुखबिरों के इन शहीदों के खून से हाथ सने हुए हैं उनकी औलादें इन शहीदों के नाम पर होनेवाली नौटंकियों में मुख्य अतिथि की हैसियत में होती हैं। मगर कुछ लोग हैं ऐसे भी हैं, जो इस चौतरफा दुर्दशा को देखकर अपनी आंखों के गंगा जल से अपने शहीदों का तर्पण-श्राद्ध भी करते हैं। मैं भी शायद उन्हीं में से कोई एक हूं। दावा नहीं करता। सिर्फ ऐसा सोचताभर हूं..क्योंकि मुझे कोई दुकान नहीं चलानी। देश के अमर शहीदों के अप्रतिम बलिदान को मेरे कोटिशः नमन..
इंकलाब..जिंदाबाद..
पंडित सुरेश नीरव
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और भी गम है ज़माने में शहीदों के सिवा
जिन्हें कुछ नहीं करना होता है उनके अपंग तर्क ही बहाने कहलाते हैं। गर्मी में गर्मी का कहर,सर्दी में शीत का प्रकोप,बारिश में  बरसात की अराजकता। फिर घर में तमाम झंझटे। बच्चे की कॉपी पेंसिल से लेकर बीबी की शॉपिग तक। समय कहां हैं,इन कर्मयोगियों के पास। शहीदों को याद करना तो फुर्सतियों के दिमाग की खलल है। ईश्वर इन्हें माफ करना ये नहीं जानते कि ये क्या गुनाह कर रहे हैं।
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ग़ज़रौला में कवि सम्मेलन
अखिल भारतीय भाषा साहित्य सम्मेलन के तत्वावधान में 24 मार्च की सायं एक विराट कवि सम्मेलन का आयोजन गजरौला में किया जा रहा है। आयोजन की संयोजक डॉक्टर मधु चतुर्वेदी के अनुसार समारोह का उदघाटन उ.प्र. के मंत्री डॉ.यशवंत सिंह तथा संचालन हिंदी के प्रख्यात कवि पं. सुरेश नीरव करेंगे। इस अवसर पर सुरेश नीरव की पुस्तक उत्तर प्रश्नोपनिषद का लोकार्पण भी किया जाएगा। कवि सम्मेलन में डॉ.कुंअर बेचैन,वसीम वरेलवी, सुरेन्द्र शर्मा,पुरुषोत्तम नारायण सिंह, अरविंद पथिक और रजनीकांत राजू सहित अनेक कवि रचना पाठ करेंगे। जयलोकमंगल की शुभकामनाएं...।
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