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Wednesday, March 16, 2011

दिल धड़कता है फ़ोन बजते ही

ग़ज़ल
मेरी आँखों में एक चेहरा है
उसका होंटों पे नाम रहता है
दिल धड़कता है फ़ोन बजते ही
ऐसा लगता है फ़ोन तेरा है
मैं तेरा इन्तिज़ार करता हूँ
...जाने ये इन्तिज़ार कैसा है
कितने दिन से तुझे नहीं देखा
हर घड़ी तुझको दिल ने सोचा है
उससे कह दो `तुषार` आ जाए
उसका आभास रोज़ होता है -
- नित्यानंद `तुषार`
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