Search This Blog

Showing posts with label गजल. Show all posts
Showing posts with label गजल. Show all posts

Wednesday, March 16, 2011

दिल धड़कता है फ़ोन बजते ही

ग़ज़ल
मेरी आँखों में एक चेहरा है
उसका होंटों पे नाम रहता है
दिल धड़कता है फ़ोन बजते ही
ऐसा लगता है फ़ोन तेरा है
मैं तेरा इन्तिज़ार करता हूँ
...जाने ये इन्तिज़ार कैसा है
कितने दिन से तुझे नहीं देखा
हर घड़ी तुझको दिल ने सोचा है
उससे कह दो `तुषार` आ जाए
उसका आभास रोज़ होता है -
- नित्यानंद `तुषार`

Thursday, March 10, 2011

प्यार का मीठा एहसास हैं बेटियाँ

बेटियाँ (ग़ज़ल)

प्यार का मीठा एहसास हैं बेटियाँ
घर के आँगन का विश्वास हैं बेटियाँ.
वक़्त भी थामकर जिनका आँचल चले
ढलते जीवन की हर आस हैं बेटियाँ.
जिनकी झोली है खाली, वही जानते
पतझरों में भी मधुमास हैं बेटियाँ.
उनकी पलकों के आँचल मैं खुशियाँ बहुत
जिनके दिल के बहुत पास हैं बेटियाँ.
तुम न समझो इन्हें दर्द का फ़लसफ़ा
कृष्ण राधा का महारास हैं बेटियाँ.
रेत-सी ज़िन्दगी मैं दिलों को छुवे
मखमली नर्म सी घास हैं बेटियाँ.
गोद खेली, वो नाजों-पली फिर चली,
राम-सीता का वनवास हैं बेटियाँ.
जब विदा हो गयी, हर नज़र कह गयी
ज़िन्दगी भर की इक प्यास हैं बेटियाँ
महिला दिवस की हार्दिक मंगल कामनाएं.
डॉ हरीश अरोड़ा

Thursday, March 3, 2011

सुना है एक तिनके के, सहारे पा गए साहिल

तेरी रंगीन दुनियाँ के नज़ारे हम को ले डूबे |

बुलाते से बहारों के इशारे हम को ले डूबे ||



शिकायत या करे शिकवा , भला किस दर पै जा कर के |


जिन्हें समझे थे हम अपना , हमारे हम को ले डूबे ||



बामुश्किल ज़ोरे -तूफां से, बचा लाए सफीने को |


नज़र आने लगी मन्जिल, किनारे हमको ले डूबे ||



सुना है एक तिनके के, सहारे पा गए साहिल |


कोई कह पाए ना तेरे , सहारे हम को ले डूबे....।.
-प्रवीण आर्य

Tuesday, February 22, 2011

तुझे ये पता नहीं है

तुझे चाहता हूँ कितना , तुझे ये पता नहीं है
तुझे छोड़ और कोई , नज़र में रहा नहीं है

मेरे सामने है दुनिया , मेरे सामने हैं राहें
तेरे पास ला सके जो , वही रस्ता नहीं है

तुझे भूलने की कोशिश कई बार कर चुका हूँ
मेरा दिल बड़ा अजब है कभी मानता नहीं है

मुझे चाहते हैं चेहरे , मुझे चाहतीं हैं खुशियाँ
तुझे छोड़ दिल किसी को कभी सोचता नहीं है

तेरे पास मैं नहीं हूँ , मेरे पास तू हमेशा
मेरा जिस्म दूर है पर ,मेरा दिल जुदा नहीं है

कभी ये `तुषार` सोचा, तेरा क्या नसीब निकला
जिसे चाहता रहा तू तुझे वो मिला नहीं है -
नित्यानंद `तुषार`

Sunday, February 20, 2011

नित्यानंद तुषार की ग़ज़ल

जितने चेहरे देखे हैं
सारे तुझसे फीके हैं

तेरे ख़त के अक्षर भी
फूलों जैसे महके हैं

तेरी साँसों के हिस्से
इन साँसों में रहते हैं

तू जाने किस हाल में है
मेरे नयना भीगे हैं

तुझको इक दिन पाएंगे
ऐसा दिल से कहते हैं

तुझको याद नहीं हैं हम
हम तुझको कब भूले हैं

यूँ जीते हैं तेरे बिन
हम किश्तों में मरते हैं - -
-नित्यानंद `तुषार`

Saturday, October 16, 2010

डा.रमा द्विवेदी की ग़ज़ल-

 किसी से क्या बताएं कि क्या-क्या हम छिपाते हैं
जमाने को दिखाने को हंसी होंठों पर लाते हैं

बने खुदग्ज वे इतने उन्हें लब चाहिए लेकिन
वफा उनकी है बस इतनी कि बिन सावन रुलाते हैं

फकत उनके रिझाने को दिखाते नूर चेहरे पर
कहीं वे रूठ न जाएं ये गम हमको सताते हैं

तृषा अपनी बुझाने को बढ़ाते तिश्नगी मेरी
नहीं मिलता है स्वातिजल पिऊ-पिऊ रट लगाते हैं

यही ख्वाहिश रही दिल की अंजुरी में चांद आ जाए
निशा रोई है शबनम बन सुबह वे मुस्कराते हैं।
0000000000000000000000000000000000000000000000000000000000000000000000000000000000

Friday, October 15, 2010

नज़र लगेगी जो रुखसार पे न तिल होगा

डा.प्रेमलता नीलम
ग़ज़ल-
आईने सा जो साफ दिल होगा
टूट जाएगा बचाना बड़ा मुश्किल होगा

यूं न चिलमन उठाइए सरे महफिल जानां
नज़र लगेगी जो रुखसार पे न तिल होगा

इक-न-इक दाग जरूरी है ज़िंदगी के लिए
पर न सोचा था मेरा अपना संगदिल होगा

तब तो डूबी नहीं मझधार में थी जब कश्ती
क्या पता था डूबना सरे साहिल होगा

अब अगर शिकवा करें भी तो नीलम कैसे
अपना माझी ही क्या समझे थे कातिल होगा।

डाक्टर प्रेमलता नीलम (दमोह)
मो. 09425406017
000000000000000000000000000000000000000000000000000000000000000000000000000000000

Sunday, October 3, 2010

दिल से किसी की याद के साये नहीं गए

खास ख़बर-


मेरठ में हुआ काव्य पाठ। सुप्रसिद्ध ग़ज़लकार औंकार गुलशन,पुरुषोत्तम वज्र और पंडित सुरेश नीरव ने श्रोताओं को किया भाव विभोर..

ग़ज़ल-

बीते हुए ज़माने भुलाए नहीं गए
दिल से किसी की याद के साये नहीं गए






यूं तो ताल्लुकात हमारे भी कम न थे
हमसे ताल्लुक़ात भुनाए नहीं गए


बैठे हुए थे सामने गैरों के साथ वो
महफिल में हमसे शेर सुनाए नहीं गए


पलभर को न जी सके बनावट की ज़िंदगी
हालात हमसे अपने छुपाे नहीं गए


दिल तो तुम्हारी याद में रोया बहुत मगर
आँखों से हमसे अशअक बहाए नहीं गए




गुलशन यूं रस्मोराह ग़ज़ल से न हो सकी
हमसे ग़ज़ल के नाज. उठाए नही गए।
औंकार गुलशन,