ग़ज़ल
मेरी आँखों में एक चेहरा है
उसका होंटों पे नाम रहता है
दिल धड़कता है फ़ोन बजते ही
ऐसा लगता है फ़ोन तेरा है
मैं तेरा इन्तिज़ार करता हूँ
...जाने ये इन्तिज़ार कैसा है
कितने दिन से तुझे नहीं देखा
हर घड़ी तुझको दिल ने सोचा है
उससे कह दो `तुषार` आ जाए
उसका आभास रोज़ होता है -
उसका होंटों पे नाम रहता है
दिल धड़कता है फ़ोन बजते ही
ऐसा लगता है फ़ोन तेरा है
मैं तेरा इन्तिज़ार करता हूँ
...जाने ये इन्तिज़ार कैसा है
कितने दिन से तुझे नहीं देखा
हर घड़ी तुझको दिल ने सोचा है
उससे कह दो `तुषार` आ जाए
उसका आभास रोज़ होता है -
- नित्यानंद `तुषार`


