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Thursday, March 10, 2011

प्यार का मीठा एहसास हैं बेटियाँ

बेटियाँ (ग़ज़ल)

प्यार का मीठा एहसास हैं बेटियाँ
घर के आँगन का विश्वास हैं बेटियाँ.
वक़्त भी थामकर जिनका आँचल चले
ढलते जीवन की हर आस हैं बेटियाँ.
जिनकी झोली है खाली, वही जानते
पतझरों में भी मधुमास हैं बेटियाँ.
उनकी पलकों के आँचल मैं खुशियाँ बहुत
जिनके दिल के बहुत पास हैं बेटियाँ.
तुम न समझो इन्हें दर्द का फ़लसफ़ा
कृष्ण राधा का महारास हैं बेटियाँ.
रेत-सी ज़िन्दगी मैं दिलों को छुवे
मखमली नर्म सी घास हैं बेटियाँ.
गोद खेली, वो नाजों-पली फिर चली,
राम-सीता का वनवास हैं बेटियाँ.
जब विदा हो गयी, हर नज़र कह गयी
ज़िन्दगी भर की इक प्यास हैं बेटियाँ
महिला दिवस की हार्दिक मंगल कामनाएं.
डॉ हरीश अरोड़ा
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