Search This Blog

Wednesday, March 16, 2011

मची बिरज में होली...

                    ये होली है जयलोकमंगल की
 जहां मनाई है इस बात की कि भौंडापन न आए त्योहार में और होली का त्योहार बदल न जाए इमोशनल अत्याचार में। पतझड़ आ न जाए बहार में..यह होली की नसीहत दे रही हैं मंजुऋषि और प्रेमलता नीलम.जिसे सुनकर पंडितजी ने डालदी पिचकारियां वापस बाल्टी में...सुना कुछ आपने
Post a Comment