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Wednesday, April 27, 2011

 आदरणीय श्री गौड़ साहब,
आपका आलेख भ्रष्चार के तंत्र को बेनकाब करता है। बड़ी सफलता के साथ। पूरा लेख बहुत ही सार्थक बन पड़ा है। खासकर ये पंक्तियां-
63 सालों का घोटालों का इतिहास साक्षी है कि घोटालेबाज चाहे केन्द्र के रहे हों अर्थार्त प्रदेश के, उनका आज तक कुछ भी नहीं हुआ और न भविष्य में कुछ होने वाला है। भले ही जनता की नजर में वे दागदार रहे हों लेकिन यह निश्चित है कि वर्तमान तंत्र के अंतर्गत वे बेदाग छूटेंगे। क्योंकि पिछले 63 बरसों की एक भी नजीर ऐसी नहीं है जिसे सामने रख कर यह कहा जा सके कि हाँ फलाँ घोटाले में फलाँ घोटालेबाज को इतनी सजा हुई थी।
ऐसे ही घुटन भरे नीम अँधेरे में से एक सूरज निकला जिसका नाम है -अन्ना हजारे , यह सूरज निकला महाराष्ट्र की धरती पर। हालांकि सूचना का अधिकार (आर.टी.आइ) का कानून बनते समय- अन्ना हजारे का नाम सुर्ख़ियों में रहा, लेकिन उसे तब तक बालरवि के रूप में ही जाना जाता रहा। लेकिन 5 अप्रैल का यह अन्ना हजारे नाम का सूरज अचानक दिल्ली की दहलीज पर आ चमका। और उसने आते ही भ्रष्टाचार के विरुद्ध एक बिगुल बजा दिया। उसके शंख की ध्वनि पूरे देश में पहुंच गई और सारा देश एक गहरी निद्रा से जाग गया।
मेरे प्रणाम..
पंडित सुरेश नीरव
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