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Sunday, June 5, 2011

.बाबा जैसा हाल होगा .......

देश की सरकार जनता से यह चाहती है.
१ गांधी जी के तीन बंदरों की तरह रहने कि आदत जनता डाल ले.
२. देश मे भरश्टाचार के खिलाफ़ कोई भी नहीं बोलेगा. जो बोलेगा उसको पुलिस के डंडे खाने पडेंगे जनता भूल गई एमरजेंसी की यातनाएं
३ कांग्रेस की भारत माता सोनिया जी है उन्हे जो पसंद हो वही करिये वरना सोच लिजिये....बाबा जैसा हाल होगा .......
४. इस बात का ध्यान रहे कि देश का कोई भी गरीब व्यक्ति दो सूखी रोटी ना खा पाये यदि एसा होता है तो बस उस दिन से मंहगाई की नई दरें लागू कर दी जांए.
५. सरकार की खिलाफ़त करना देशद्रोह है लेकिन आतंकवादी अफ़जल और कसाब हमारे मेहमान है उन्हे कोई परेशानी जेल में ना हो उन्हे फ़ासी से बचाने की कोशीश भी चल रही है
६. बाबा रमदेव और अन्ना हजारे को कोरा आश्वासन दिया जाएगा आप हमारी मजबुरी समझिये यदि हम भ्रश्टाचार के खिलाफ़ हो जाएंगे तो सरकार भी गिरेगी और हम बेनकब भी हो जांएगी इसलिये अनशन जैसी गलती मत किजिए.
कुमार संभव

Tuesday, May 10, 2011

मेरा भारत महान
पाकिस्तान भी कोई देश है। जहां बिन लादेन तक सुरक्षित नहीं। देश तो हमारा हिंदुस्तान है। मजाल है जो यहां अजमल कसाव और अफजल गुरू को कोई छू भी सके। जयहिंद।
सुरेश नीरव

Wednesday, April 27, 2011

 आदरणीय श्री गौड़ साहब,
आपका आलेख भ्रष्चार के तंत्र को बेनकाब करता है। बड़ी सफलता के साथ। पूरा लेख बहुत ही सार्थक बन पड़ा है। खासकर ये पंक्तियां-
63 सालों का घोटालों का इतिहास साक्षी है कि घोटालेबाज चाहे केन्द्र के रहे हों अर्थार्त प्रदेश के, उनका आज तक कुछ भी नहीं हुआ और न भविष्य में कुछ होने वाला है। भले ही जनता की नजर में वे दागदार रहे हों लेकिन यह निश्चित है कि वर्तमान तंत्र के अंतर्गत वे बेदाग छूटेंगे। क्योंकि पिछले 63 बरसों की एक भी नजीर ऐसी नहीं है जिसे सामने रख कर यह कहा जा सके कि हाँ फलाँ घोटाले में फलाँ घोटालेबाज को इतनी सजा हुई थी।
ऐसे ही घुटन भरे नीम अँधेरे में से एक सूरज निकला जिसका नाम है -अन्ना हजारे , यह सूरज निकला महाराष्ट्र की धरती पर। हालांकि सूचना का अधिकार (आर.टी.आइ) का कानून बनते समय- अन्ना हजारे का नाम सुर्ख़ियों में रहा, लेकिन उसे तब तक बालरवि के रूप में ही जाना जाता रहा। लेकिन 5 अप्रैल का यह अन्ना हजारे नाम का सूरज अचानक दिल्ली की दहलीज पर आ चमका। और उसने आते ही भ्रष्टाचार के विरुद्ध एक बिगुल बजा दिया। उसके शंख की ध्वनि पूरे देश में पहुंच गई और सारा देश एक गहरी निद्रा से जाग गया।
मेरे प्रणाम..
पंडित सुरेश नीरव

Thursday, April 21, 2011

लोकमंगल को रोज लगभग तेरह हजार लोग पढ़ रहे हैं


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लोकमंगल को रोज लगभग तेरह हजार लोग पढ़ रहे हैं.....
 रचनाकारों को कोशिश करनी चाहिए कि वे नियमित लिखें। और अपनी बात व्यापक वर्ग तक पहुंचाएं
                 जयलोकमंगल...
पंडित सुरेश नीरव
* श्री बी.एल.गौड़ की नागरिक रचना अच्छी लगी।* श्री भगवानसिंह हंस का संस्मरण अच्छा लगा। * श्री प्रकाश प्रलय की क्षणिकाएं बढ़िया लगी।
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Wednesday, April 20, 2011

जघन्य अपराध की भर्त्सना करता हूं..

नागेन्द्र पांडेयजी, 
आजकल साहित्य में चोर कुछ ज्यादा ही सक्रिय हैं। और फेसबुकिये तो अक्सर वे हैं जो कभी किसी बुक के फेस पर नहीं आ पाते तो फेसबुक पर ही कुत्सित कार्य करते रहते हैं। मैं इस जघन्य अपराध की भर्त्सना करता हूं..
अभी फेस बुक ,  की सैर करते- करते अपनी एक कविता हाथ लगी . किन्ही कमल पाण्डेय ने इसे फेस बुक पर 9 अक्तूबर , 2010 को अपने नाम से पोस्ट किया है और प्रशंसा  करने वालों को बड़े गौरव के साथ धन्यवाद भी कहा है . दूसरे की रचना को अपने नाम से प्रकाशित करना घ्रणित ही नहीं निंदनीय भी है . इंटरनेट पर इसकी रोक के लिए सख्ती से कदम उठाने होंगे . मैं कमल की भर्त्सना करता हूँ . 
सुरेश नीरव

Tuesday, April 5, 2011

इन्हें पढ़ना भी अच्छा लगता है।



आदरणीय नीरवजी,
जयलोकमंगल में इन दिनों बहुत बढ़िया-बढ़िया लोग लिख रहे हैं। और खूब स्तरीय लिख रहे हैं। पूनम दहिया,नित्यानंद तुषार, सुजाता मिश्र,अरविंद योगी, सुरेश ठाकुर.पंकज अंगार,रवीन्द्र शुक्ल और भी न जाने कितने लोग हैं,जो ब्लॉग की शान-शौकत बढ़ा रहे हैं। कुछ लोग एक दम गायब भी हो गए हैं। ये बदलाव कैसा है। कहां गए वे लोग जो हंस और मकबूल हुआ करते थे। मधु चतुर्वेदी, मंजु ऋषि,अरविंद पथिक औररजनीकांत राजू। मैं चाहती हूं कि ये लोग भी लिखें। इन्हें पढ़ना भी अच्छा लगता है।
नए संवतसर की शुभकामनाएं..
डॉक्टर प्रेमलता नीलम

Friday, March 25, 2011

प्रशांत योगीजी भगवान हो गए


प्रशांत योगीजी भगवान हो गए हम मृत्युलोक के प्राणियों का उन्हों साधुवाद। मगर क्या यह अनुचित नहीं है। मैं जयलोक मंगल के साथियों से चाहती हूं कि वे इस मुद्दे पर अपने प्रश्न पूछे।
डॉक्टर प्रेमलती नीलम

क्यों भगवान हैं प्शांत योगी

 आज पंडित सुरेश नीरव ने भगवान लिखा है- प्रशांत योगी को। मैं स्वयं प्रशांत योगी का प्रशंसक हूं,मगर पंडितजी ने जो उन्हें संबोधन दिया क्या वह क्या उचित है,और क्या आम जनता इसे सहज स्वीकार कर लेंगे। मेरी यही जिज्ञासा है में पंडितजी और योगीजी से स्पष्टीकरण जानना चाहूंगा। कृपया इसे अन्यथा न लें।
-भगवान सिंह हंस

शादी के तीस सूत्र


शादीः मंगल सूत्र के तीस सूत्र
पंडित सुरेश नीरव
तमाम लोग कभी अपने दोस्तों से तो कभी अपने आप से यह प्रश्न पूछते रहते हैं कि आखिर ये शादी है क्या। क्या है शादी की केमिस्ट्री। तो साहब पेश है इस मंगल सूत्र के खासम-खास ये तीस सूत्र। अगर कोई सूत्र आप भी इनमें जोड़ना चाहें तो इसमें जोड़ सकते हैं। हम इस बात की गारंटी देते हैं कि आपके नाम और पते को गोपनीय रखा जाएगा ताकि आपकी पत्नी को इसका पता न चले।
1. तो पहली बात तो यह समझ लें कि शादी कोई शब्द-वाक्य यानीकि सेंटेंस नहीं है। शादी तो आजीवन कारावास मतलब कि (Life sentence) है।
 2. शादी तो प्रेम है। प्रेम अंधा होता है। इसलिए शादी अंधों की सामाजिक संस्था हुई।.
 3. शादी वो संस्था है जहां आदमी अपनी जिंदगी की बेचलर डिग्री खो देता है और आदमी को अपना स्वामी यानीकि मास्टर प्राप्त होता है।
 4.  शादी तीन रिंगवाला सर्कस है- जिसमें आदमी इंगेंजमेंट रिंग, मेरिज रिंग और सफरिंग यानीकि कष्ट-रिंग से गुजरना पड़ता है।
 5. शादीशुदा जिंदगी कुंठा और उत्तेजना से भरपूर होती है। शादी की पहली साल पति बोलता है और पत्नी सुनती है।  दूसरी साल पत्नी बोलती है और पति सुनता है।. शादी की तीसरी साल से पति और पत्नी दोनों बोलते है और पड़ोसी सुनते हैं।
6.      शादी होटल में जाने के एक ऐसे तजुर्बे की तरह है जहां आदमी बैरे को आर्डर करता है मगर जैसे ही वह चीज उसे मिलती है वह यह सोचकर पछताने लगता है कि यार इसके बजाय तो दूसरी वाली चीज का ऑर्डर कर देता तो ठीक रहता।
7.      आदमी को बड़बड़ाने से पहले खूब सोच लेना चाहिए। चर्च में जाकर वो कुछ शब्द बड़बड़ाता है तो उसकी शादी  हो जाती है और जब सोते में कुछ शब्द बड़बड़ाता है तो उसका तलाक हो जाता है।
8.      एक सफल शादी लेन-देन का ऐसा कारोबार होता है जिसमें पति सिर्फ देता है और पत्नी जिंदगी सिर्फ लेती-ही-लेती है।.
 9. बेटाः पिताजी शादी में कितना खर्चा आता है। पिताः पता नहीं बेटा क्योंकि मैं तो बेटा आज तक खर्च ही किए जा रहा हूं।
 10. एक लड़का अपने पिताजी से पूछता है कि पिताजी हमने सुना है कि चीन में पुराने समय में पत्नी की पहचान पति को शादी के बाद ही होती है। पिताः बेटा ऐसा तो सभी जगह होता है। और आज तक हो रहा है।
 11. मुहब्बत यदि एक सुखद और लंबा सपना है। और शादी एलार्म घड़ी है।
12. एसा माना जाता है कि शादी से पहले आदमी औरत का हाथ पकड़ता है तो यह क्रिया मुहब्बत कहलाती है और शादी के बाद जब उसी औरत का हाथ पकड़ता है तो यह क्रिया आत्म सुरक्षा के लिए किया गया बचाव कहलाता है। 
 13. शादी के कुछ दिनों तक आदमी जब खुश रहता है तो हमें मालुम रहता है कि आदमी क्यों खुश है मगर शादी के बहुत दिनों बाद भी यदि वह खुश रहता है तो हमें ताजुब्ब होता है कि आखिर ये आदमी खुश क्यों है।
 14. मुहब्बत में आदमी कहता है कि जानेमन तुझे पाने के लिए में नर्क में भी जा सकता हूं। शादी के बाद उसकी मनोकामना पूरी होजाती है और वह वर्क में ही रहता है।  
 16. किसी की बीबी चुराने की इससे बड़ी सजा और कुछ नहीं हो सकती कि बीबी उस चुरानेवाले के ही पास रह जाए।
 17. शादी के बाद अमेरिका में 80 प्रतिशत लोग बीवी को धोखा देते हैं और शेष 20 प्रतिशत यूरोप में रहते हैं।  सौभाग्य से हमारा देश तो एशिया में आता है।
 18. शादी के बाद पति-पत्नी सिक्के दो ऐसे पहलू बन जाते हैं जो हमेशा साथ रहते हैं मगर कभी एक-दूसरे से मिल कभी नहीं पाते।
 19. शादी के बाद आदमी और औरत दो नहीं रहते। मिटकर दोनों एक हो जाते हैं।. समस्या तब आ जाती है जब यह फैसला नहीं हो पाता कि दोनों में से एक कौन मिटे जो दो एक हो जाएं।
 20. शादी से पहले प्यार किसी की कमाई है शादी उस प्यार की टैक्स अदाई है।
 21. शादी किसी भी नाम की लड़की से कर लीजिए शादी के बाद सभी का नाम झंझट ही निकलता है।.
 22. यह सही नहीं है कि शादीशुदा आदमी कुंआरे आदमी से ज्यादा लंबी जिंदगी जीता है। सच तो यह है कि शादी-शुदा आदमी को अपनी जिंदगी लंबी लगती है।
 23. किसी की पत्नी का मर जाना सबसे बड़ी दुर्घटना है। मेरे लिए यह एक नामुमकिन.हादसा है।
 24. दुर्भाग्य भी कैसे-कैसे आता है।  एक आदमी अपने दोस्त को बता रहा था- मेरे जीवन में अचानक बहार आ गई, मेरे पास खूब पैसा रहने लगा, खूबसूरत मकान में मैं एक खूबसूरत लड़की के साथ रहने लगा,लेकिन एक दिन सब कुछ मिट गया। दूसरे दोस्त ने ऐसा क्या हुआ। दोस्त ने लंबी सांस लेते हुए बताया कि दुर्भाग्य से खोई हुई पत्नी वापस घर आ गई।.
 25. पत्नीः (फोन पर) सुनो डार्लिंग आज रात बाहर मस्ती की करने का मन है।
पतिः मस्ती जरूर करो, मगर घर में हॉल की लाइट खुली छोड़ जाना। मैं भी ऑफिस में ओवर टाइम कर लूंगा।
 26. एक कॉकटेल पार्टी में एक महिला ने दूसरी से कहा- बहन तुमने शादी की अंगूठी गलत उंगली में क्यों पहन रखी है। क्योंकि मैंने गलत आदमी से शादी करली है। दूसरी सहेली ने ठंडी सांस लेते हुए कहा।
 27. शादी से पहले आदमी अधूरा रहता है और शादी के बाद वो बिलकुल खत्म हो जाता है।.
 28. बेचारा शादी-शुदा आदमी कितनी ही नौकरियां बदल ले मगर घर में उसका बॉस कभी नहीं बदलता।
 29. एक कुंआरे ने अखबार में विज्ञापम दिया- एक पत्नी चाहिए। दूसरे दिन उसके पास सैंकड़ों पत्र आ गए कि- हमारी पत्नी ले जाइए।
 30. जब कोई व्यक्ति अपनी बीवी के लिए कार का दरवाजा खोले तो समझ लीजिए कि या तो कार नई है या फिर बीवी नई नवेली है।

Sunday, March 6, 2011

सक्रियता और समर्पण को सलाम..


आज पंडित सुरेश नीरवजी की बेहतरीन गज़ल पढ़ी। ये ग्वालियर की मिट्टी है जिसमें कविता बहुत गहरे तक रमी हुई है. दिल खुश हो गया। मैं 12 को दिल्ली आ रहा हूं तब सभी से मिलूंगा।
श्री भगवानसिंहहंसजी ने दुबारा मोर्चा संभाल लिया है. बीच में वे तकनीकि कारणों से दिखाई नहीं दिए। उनकी सक्रियता और समर्पण को सलाम..
जगदीश परमार
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Tuesday, March 1, 2011

योगीजी के कमाल



मैं कई दिनों से जयलोकमंगल को देख-परख रहा हूं। एक बात जो सामने आई है वो ये कि पंडित सुरेश नीरव को उनके अंदाज़ में सराहनेवाले सज्जन प्रशांत योगी ही है। जो उनके व्यक्तित्व को तो सराहते हैं हीं,उनके कृतित्व को भी काव्यात्मक बना देते हैं। टेक्नेकली आप कोई बहुत मजबूत आदमी जान पड़ते हैं। जान क्या पड़ते हैं। आप हैं हीं। आपको मेरे सलाम..
जगदीश परमार,ग्वालियर
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Wednesday, February 23, 2011

बहुत शुक्रिया बड़ी मेहरबानी

श्री भगवानसिंह हंसजी 
आपकी सशक्त लेखनी का कमाल देख रहा हूं। आपने मेरे लिए जो उदगार प्रस्तुत किए हैं मैं उनका कायल हूं। और आपके प्रति अपना आभार व्यक्त करता हूं। चलिए एक जिंदा आदमी को बुत बना ही दिया हमारे इशु ने। अभिषेक मानवजी के सपूत जो न करें वो थोड़ा ही है। 
 अभिषेक मानवजी
मैं आपको आपकी  टिप्पणी  और बहुत सुंदर व्यंग्य के लिए  हार्दिक बधाई देता हूं। आप अच्छा लिखते हैं मगर इतना अच्छा क्यों लिखते हैं ये बात जरूर आपसे पूछना चाहता हूं। है कोई जवाब आपके पास। हे ईशु के परम पावन पूज्य पिताजी आप महान हैं। मानव में इंसान हैं। पूरा हिंदुस्तान हैं।
मेरे प्रणाम..
पंडित सुरेश नीरव

Saturday, February 19, 2011

बात उल्लू ने कही गुस्सा गधे को आ गया



योगीजी
आपका राबिया का प्रसंग बहुत अच्छा लगा।

ए
क शाम राबिया बाइबल पड़ती हुई कुछ वाक्यों को
रेखांकित कर रही थी !पादरी पहले तो एक सूफी संत के हाथ में बाइबल देखकर खुश हुए फिर शंकित शब्दों में पूछा "राबिया तुम किन शब्दों को रेखांकित कर रही हो ?मैं रेखांकित नहीं बल्कि कुछ कथ्यों का पुनरावलेखन रही हूँ ! थोड़ा संशोधन कर रही हूँ ! कुछ धारणाओं और अवधारणाओं का अभ्युथान कर रही हूँ ! इसमें लिखा है पाप से घ्रणा करो ,पापी से नहीं ! मै कहती हूँ घ्रणा हो ही क्यों ?
अपने जीवन को मेरे प्रेम कहें !

पंडित सुरेश नीरवजी,
आपकी हास्य गजल और बात उल्लू ने कही रचना लाजवाब है। खासकर ये टुकड़ा मुझे बहुत दिलचस्प लगा है-

गुस्ल करवाने को कांधे पर लिए जाते हैं लोग

ऐसे बूढ़े शेख को भी पांचवी शादी का योग

जाते-जाते एक अंधा मौलवी बतला गया

बात उल्लू ने कही गुस्सा गधे को आ गया

जय हो उस गधे की जिसे उल्लू की बात पर गुस्सा आ गया

डॉक्टर मधु चतुर्वेदी

Monday, February 14, 2011

जिस देश में नदियों और वृक्षों की पूजा की परंपरा रही हो

आज जिस स्थिति में हमारी नदियां और जंगल हैं उनका दर्द सहना और कहना संवेदनशील कवि का धर्म है। पंडित सुरेश नीरव ने इसे नीरज नैथानी की भूमिका में बखूबी कहा है। मैं श्रीनगर में नीरज नैथानी को सुन चुका हूं। अच्छे कवि हैं। उनके संकलन हेतु बधाई। नीरवजी की इन पंक्तियों पर गौर किया जाना चाहिए-
जिस देश में नदियों और वृक्षों की पूजा की परंपरा रही हो, अपने अमृत तुल्य जल से सभी की प्यास बुझाती रही हो आज उसी देश की नदियां प्रदूषण का जहर पी रही हैं और तड़फ-तड़फकर दम तोड़ रही हैं। जंगल जहां कभी पक्षियों का संगीत गूंजा करता था। आज वहां सन्नाटा पसरा हुआ है। और जंगलों के साथ यह सब बदसलूकी भौतिकता के मोहपाश में जकड़ा आदमी कर रहा है जिसपर जंगलों ने हमेशा दुआओँ की बारिश की है।
यह दर्द ही नीरज नैथानी की कविताओं का प्राण तत्व है। महर्षि अरविंद कहते हैं कि प्रकृति सदा संतुलन और तारतम्य की खोज में रहती है। जीवन और पदार्थ भी उसी खोज में हैं जिस तरह मन अपनी अनुभूतियों को सुव्यवस्थित देखना चाहता है। पर्यावरण
प्रकृति का मन है। यह पर्यावरण
ही मन को संचालित करता है। अगर पर्यावरण का मन अशांत है तो हमारा मन कैसे शांत हो सकता है। हमारी अनुभूतियां कैसे इस प्रभाव से अछूती रह सकती हैं।
जगदीश परमार

जान देने से पहले अपनी एक किड्नी दे दो|

अशोक शर्माजी,
आपकी वेलेंटाइन डे पर हास्य रचना पढ़ी। पढ़कर मजा आ गया। सचमुच प्रेम में जो खोखले डॉयलाग मारे जाते हैं उनके आगे तो झूठे नेता भी पीछे रह जाते हैं। आपने अच्छी खिचाी की है,खासकर इन पंक्तियों में
प्रेमिका बोली - अपनी मीठी-मीठी बातों से
मेरे दिल को मत छेदो
और जान देने से पहले
अपनी एक किड्नी दे दो|

किडनी का नाम सुनते ही प्रेमी हड़बड़ाया
बोला तुम्हारी तो दोनो ठीक हैं, फिर किसलिए
बताइए - बताइए
प्रेमिका बोली - मुझे अपने लिए नही
अपनी दादी के लिए चाहिए
दादी का नाम सुनते ही प्रेमी वहाँ से दौड़ गया
अपनी प्रेमिका तो क्या
अपनी साइकल भी वहीं छोड़ गया|
मेरी शुभकामनाएं...
सुरेश नीरव

Sunday, February 13, 2011

भाषा के कट्टरपन को खारिज करता है वहीं उसको अनावश्यक महत्व देने की अतार्किक प्रवृति पर भी लगाम कसता है।

 आदरणीय श्री  विश्वमोहन तिवारीजी 
आप एक सार्थक अभियान से लौटे हैं,इस हेतु आपको कोटिशः बधाई। आप स्वयं अपने आप में एक जीवंत संस्थान हैं और आपकी शीतल-स्निग्ध छाया में तमाम संस्थाएं पुष्पित-पल्लवित होती रही हैं ,और हो भी रही हैं।
0 मैं भी आज ग्वालियर तथा भोपाल के लिए रवाना हो रहा हूं। और वहां अखिल भारतीय भाषा साहित्य सम्मेलन के समारोह में भाग लूंगा।
0अंग्रेजी की वैकल्पिक उपयोगता पर आपका आलेख जहां भाषा के कट्टरपन को खारिज करता है वहीं उसको अनावश्यक महत्व देने की अतार्किक प्रवृति पर भी लगाम कसता है।
इन पंक्तियों में आपने काफी-कुछ कह दिया है-
हमें अंग्रेजी भाषा अवश्य सीखना चाहिये, किन्तु एक अतिरिक्त उपयोगी भाषा की तरह, न कि अपनी भाषाओं की कीमत पर। संस्कृति के भ्रष्ट होने के अतिरिक्त अंग्रेजी में जीवन जीने की दो महत्वपूर्ण हानियां और हैं।एक तो हम सीखी गई विदेशी भाषा में अनुसंधान तथा सृजन उतनी कुशलता तथा उत्कृष्टता से नहीं कर सकते जितना अपनी मातृभाषा में आत्मसात किये ज्ञान के द्वारा। तभी इज़राएल जैसा देश जिसकी आबादी हमारी आबादी के एक प्रतिशत से भी कम है, विज्ञान में ग्यारह नोबेल पुरस्कार ले चुका है – हमारे एक के स्थान पर । इज़राएल जो 1948 में जन्मा और उसने हिब्रू को राष्ट.भाषा बनाया जो किसी भी देश की भाषा नहीं थी। योरोपीय देशों को तो छोड़ ही दें, अपनी भाषाओं में कार्य करते हुए जापान, चीन, कोरिया भी वैज्ञानिक प्रपत्रोंं, पीएचडी, अनुसंधानों आदि में हमसे आगे हैं और समृद्धि में भी। आर्थिक समृद्धि तथा आर्थिक स्वतंत्रता आज विज्ञान – प्रौद्योगिकी की समृद्धि पर निर्भर करती है। अर्थात अंगे्रजी की गुलामी हम जिस उद्देश्य से कर रहे हैं वह भी पूरा नहीं हो सकता। और विडम्बना है कि इस भोगवादी नशे में कोई इस सरल सत्य को भी नहीं समझना चाहता !
मेरे प्रणाम...
पंडित सुरेश नीरव

Friday, February 11, 2011

हंसजी का जवाब नहीं है

आज ब्लॉग पर बहुत ज्ञानवर्धक और रोचक सामग्री पढ़ने को मिली तबियत खुश हो गई। सामयिक लेख, महाकाव्य के अंश, मिश्र, पर जानकारी, प्रेम गीत, मानवता के शोषण से उपजा दर्द और महागुरु ईशु का प्रवचन। बारी-बारी से यदि सभी का उल्लेख किया जाए तो डॉक्टर नागेश पांडेय और डाक्टर मधु के मधुर गीत, अभिषेक मानव का ज्वलंत आलेख भगवानसिंह हंस का भक्ति महाकाव्य,अमित हंस का दार्शनिक मुक्तक हीरालाल पांडेय का मिश्र के ऊपर लिखा लेख और राजमणि के सेलुलर जेल के खींचे फोटो काफी सेहतमंद खुराक है जो हमें जयलोकमंगल की ओर ले जाती है। और प्रशंसा करने को विवश कर देती है। मैं सभी बंधुओं का हार्दिक अभिनंदन करता हूं। हां आजकल जितनी अच्छी समीक्षाएं हमारे हंसजी कर रहे हैं उनका तो जवाब ही नहीं हैं। वे खुद ही अपनी बात का जवाब हैं और कोई नहीं है। उनके जवाब में।
पंडित सुरेश नीरव

Monday, February 7, 2011

नर्म-नर्म आहट पर पांव चल रहे होंगे



मंजु ऋषि की कविता पढ़ी। पूरा बुद्ध का दर्शन अपनी पंक्तियों में कह दिया है। बुद्ध ने कहा
था कि संसार में सब नष्टवान है सिर्फ दुख है जो मरता नहीं है। दुख शाश्वत और सनातन है। दुख के द्वार से ही दुख के पार जाया जा सकता है। यही तो मंजु ने कहा है-
प्रेम के अलावा
सिर्फ दुःख है
जिसकी किस्में नहीं होती
वह अपने भदेस रूप अपनाए
रंग के साथकरता है
चहलकदमीप्रेम के अलावा सिर्फ दुःख है
जिसकी मृत्यु नहीं
. इसके बाद ब्रह्ममर्षि पंडित सुरेश नीरव की ग़ज़ल पढ़ी। कितने कोमल प्रतीक और बिंब योजना को ग़ज़ल में पिरोया है लगता है ग़ज़ल अपने होंठों से कोई मीठा-सा गीत गा रही है। आंसुओं की सूरत में दर्द ढ़ल रहे होंगे। तन्हा-तन्हा बस्ती में फूल से खयालों के नर्म-नर्म आहट पे पांव चल रहे होंगे। हर शेर लाजवाब है। बहुत गर्व होता है नीरव तुम्हें पढ़कर। मेरी उमर तुम्हे लग जाए।
धूप में
परिंदों के पंख जल रहे हों
गे
आंसुओं की सूरत में दर्द ढल रहे होंगे
तन्हा-तन्हा बस्ती में फ़ूल से ख़यालों के
नर्म-नर्म आहट पर पांव चल रहे होंगे
गर्म-गर्म सांसों के रेशमी अलावों में
मोम के बदन तप कर आज गल रहे होंगे
चांद-जैसी लड़की के शर्बती से नयनों में
ख्वाब कितने तारों के रात पल रहे होंगे
जुगनुओं की बस्ती में भोर ले के निकले हो
सबकी आंखों में नीरव आप खल रहे होंगे।
जगदीश परमार

कलात्मक प्रयास के लिए बधाई



पंडित सुरेश नीरवजी, आज अचानक ब्लॉग पर आने का मौका मिला। और वहां कैप्शन पढ़ा- पोयट ऑफ सेंचुरीः पंडित सुरेश नीरव।उत्सुकतावश क्लिपिंग को देखा। डॉक्टर मधु चतुर्वेदी की काव्यात्मक प्रस्तुति के साथ आपकी ग़ज़लें सुनने को मिलीं। जितने मूड में आपने ग़ज़लें पढ़ीं हैं उतने ही मूड में यथार्थ मेडीटेशन के स्वामी प्रशांत योगी ने वीडियो भी बनाई है। सुनके-देखकर बड़ा आनंद आय़ा। एक अच्छे प्रयास के लिए योगीजी को बधाई..
डॉक्टर प्रेमलता नीलम