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Friday, April 29, 2011

साहित्य की चौर्य परंपरा मे एक नया नाम प्रसार भारती की सर्वेसर्वा मृणाल पांडे का भी जुड गया है

साहित्य की चौर्य परंपरा मे एक नया नाम प्रसार भारती की सर्वेसर्वा मृणाल पांडे का भी जुड गया है।२६ अप्रैल के हिंदुस्तान के संपादकीय पृष्ठ पर सुभाषिनी अली ने मराठी से विष्णु भट्ट गोडसे वरसईकर कृत यात्रावृतांत के मराठी से हिंदी अनुवाद को मृंाल पांडे का अद्भुत कारनामा सिद्ध किया है।विद्वान लेखिका को शायद जानकारी नही है कि विष्णु भट्ट गोडसे की इस अत्यंत चर्चित पुस्तक का बरसों पहले कई विद्वान लेखक अनुवाद कर चुके हैं जिनमे पं०अमृतलाल नागर भी शामिल हैं।१८५७ के स्वतंत्रता संग्राम के १५० वर्ष परे होने के क्रम मे आकाशवाणी की राष्टरीय प्रसारण सेवा के लिए एक शोध कार्य करते हुए पं० सुरेश नीरव के साथ मै बार बार उक्त कृति से बार -बार गुजरा हूं एसे मे सुभासिनी अली और मृणाल पांडे जैसे साहित्य के बडे नाम किसी लेखक के योगदान का जिक्र किए बिना स्वयं स्रेय लेना चाहते हैं तो ऊनकी इस हरकत को चौर्य -परंपरा का हिस्सा ना माना जाय तो क्या माना जाय?
आप विद्वान साथियों के विचार भी इस संबंध मे आमंत्रित हैं
।।अरविंद पथिक
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