Search This Blog

Friday, April 15, 2011

इतने दिनों के अंतराल के बाद एक अंतर यह पाया की मेरी अपनी इ-मेल पर जय लोकमंगल के अंश पढ़ने को मिले। बहुत दिनों के बाद ही उस डाक को भी खोला था.निश्चय ही यह संवेदनशीलता नीरवजी के कारण ही होगी। मुझे गत कुछ सप्ताहों के हालात पढ़ने को मिले। इनमें प्रमुख था गजरौला का मधुजी का कविसम्मेलन। गत वर्ष मैं उसमें मोजूद था और एक सफल आयोजन का श्रोता था। निश्चय ही इस बार भी उससे भी अच्छा हुआ होगा.मेरी बधाइयाँ
विपिन चतुर्वेदी
Post a Comment