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Thursday, April 28, 2011

jabarjasti ke ek do sher

आदरणीय नीरव जी की बढिया गज़लें तो आप रोज पढ़ते हैं , कुछ तुकबंदी भी देखिए :-
एक उम्र आती है जब हम बोल नहीं सकते
जड़े हुए ताले होठों पर खोल नहीं सकते |

अब क्या बतलाएं है कुछ मजबूरी अपनी
झूंटा - सच्चा एक तराजू  तोल नहीं सकते |

माना की कुछ रहनुमा हमारे अच्छे हैं ,पर
रामदेव की तरह मंच से बोल नहीं सकते |

साहिब ! ये तुक्के हैं , आदरणीय नीरव जी चाहें तो इनेंह तीर बना सकते हैं , कुछ हम भी
सीख लेंगे |
बी एल गौड़     
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