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Monday, May 30, 2011

हाले-ग़म उनको सुनाते जाइए

हाले- ग़म उनको सुनाते जाइए
शर्त ये है मुस्कराते जाइए।

आपको जाते न देखा जाएगा
इन चरागों को बुझाते जाइए।

शुक्रिया लुत्फ़े- मुसलसल का मगर
गाहे गाहे दिल दुखाते जाइए।

दुश्मनों से प्यार होता जाएगा
दोस्तों को आज़माते जाइए।

रौशनी महदूद हो जिनकी ख़ुमार
उन चरागों को बुझाते जाइए।
ख़ुमार बाराबंकवी
प्रस्तुति- मृगेन्द्र मक़बूल
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