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Tuesday, September 13, 2011

हिंदी के हितेषी

जयहिदी-जयहिंदीदिवस
कल हिंदी दिवस पर आयोजित सरकारी पखवाड़ों में कल फिर मुझे दो जगह हिंदी की दशा और दिशा पर अपने विचार रखने हैं। मैं क्या बोलता हूं यह जानने के बाद भी लोग मुझे बुलाते हैं इससे यह तो लगता है कि लोग मजबूरीवश भले ही वह न कह पाते हों जो वे कहना चाहते हैं मगर बिना लाग-लपेट की बाते सुनना लोगों  को अच्छा जरूर लगता है।  ऐसे असली हिंदी के हितेषियों को  मेरे प्रणाम...
पंडित सुरेश नीरव
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