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Saturday, December 3, 2011

युवराज का खेल


हास्य-व्यंग्य-
आओ भ्रष्टाचार- भ्रष्टाचार हटाओ खेलें
पंडित सुरेश नीरव
युवराज ने अपने पार्टी सखाओं से ठुनकते हुए कहा कि अब अपना भी भ्रष्टाचार
 हटाओ- भ्रष्टाचार हटाओ का खेल खेलने का मूड हो आया है। पिछलग्गू-भग्गुओं ने ताली बजाते हुए कहा- फेंटेस्टिक आइडिया है बॉस। मोगांबो खुश हुआ कि तर्ज पर युवराज खुश हुए। फिर थोड़ा गुस्साए। बोले-जब से इस मीडिया ने इस मुद्दे को उछालना शुरू किया तब से हर ऐरा-गैरा-नत्थू खैरा देश से भ्रष्टाचार हटाने पर आमादा हो गया है। एक अदद टूटी खटिया और फूटी लुटिया की कुल जमा पूंजीवाले बुढऊ कुछ ज्यादा ही सनसना रहे हैं। उन्हें गलतफहमी है कि वो उपवास करेंगे तो भ्रष्टाचार भाग जाएगा। उपवास नहीं हुआ कछुआ छाप अगरबत्ती हो गया। इधर अगरबत्ती जली नहीं कि उधर मच्छर गायब। युवराज का चेहरा गुस्से में ईस्टमैन कलर में कलराय गया। पार्टी मेंबर कोरस में कूके-परफेक्ट एंग्री यंग मैन। गुस्से की एक्टिंग में युवराज कितने हंसीन लगते हैं। खुशामद के मुंह से चापलूसी का एक शंखनाद हुआ। सारा माहौल घोर धार्मिक हो गया। तभी एक अघोरी चेला उछला- सर..पिछले साल हम भ्रष्टाचार की दुनिया में 87वें नंबर पर थे। आपके कुशल नेतृत्व के कारण इस साल हम 95वे नंबर पर आ गए हैं। और हमें उम्मीद है कि आपकी कृपा से अगले साल जरूर 100वें नंबर पर आ जाएंगे।
100वें नंबर पर तो इसी साल पहुंच जाते अगर अन्ना-रामदेव टाइप सिरफिरे विकास की दर के बढ़ने में अड़ंगा नहीं लगाते। एक दूसरा बयान रेंगा। युवराज मुस्कुराए- हम दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र हैं। हमें टॉप पर होना चाहिए। इतने बड़े-बड़े अर्थशास्त्रियों के सहयोग के बावजूद हम अपने फिक्स टॉरगेट तक नहीं पहुंच पाए। ऐसे नहीं चलेगा। हमें और मेहनत करनी होगी। हमारा संगठन विश्व का सबसे बड़ा युवक संगठन है। चार करोड़ कर्मठ युवाओं की फौज हमारे साथ है। सभी महत्वपूर्ण मंत्रियों के होनहार बेटी-बेटे हमारे संगठन के पदाधिकारी हैं। जो पैदाइशी वीआइपी होते हैं वे होनहार तो नेचुरली होते ही हैं। क्योंकि हम दलीय लोकतंत्र के समर्थक हैं। इसलिए हमने ऐसे होनहारों को ही संगठन में जगह दी है। इससे पार्टी में अनुशासन भी रहता है और फेमली एटमॉसफिअर भी। आप सभी को देशभक्ति और ईमानदारी विरासत में मिली है। जब तीन-तीन पीढ़ियों के तपे हुए राजनैतिक परिवार की औलादें हमें थोक में मिल रही हों तो हम सड़कछाप लोगों को पद पर क्यों बैठाएं। हमें दल चलाना है। इसे दलदल नहीं बनाना है। यूं भी खुदरा कारोबार में हम यकीन नहीं करते। इतने टेलेंटेड युवाओं के साथ होते हुए भी हम क्यों पीछे हैं। हमें सीरियसली सोचना पड़ेगा। एक दो कलमाड़ियों और ए.राजाओं के बदौलत हम कहीं नहीं पहुंच पाएंगे। आप सब एक जमी जमाई कंपनी के मैनेजर्स हैं। टिटपुंजिया कार्यकर्ता नहीं। आपकी परफोरमेंस दूसरों से बेहतर होनी चाहिए। हमें ठोस रिजल्ट चाहिए। ज़रा सोचिए देश के सरकारी चाचा और हमारे निजा नाना पंडित जवाहर लाल नेहरू के जमाने में 80 हजार भ्रष्टाचार के मामले केन्द्रीय निगरानी समिति ने गृहमंत्रालय को भेजे थे। हम अपने को समय से आगे कहते हैं और हमारी परफोरमेंस इतनी पूउर है। तब वित्तमंत्री हुआ करते थे-टी.टी.कृष्णामाचारी।विपक्ष तब भी उतना ही शातिर था जितना आज है। विपक्ष ने उन्हें किसी मूंदड़ा कांड में फंसवा दिया। भ्रष्टाचार हटाने में तत्परता दिखाते हुए उन्हें नानाजी ने तुरंत पद से हटा दिया। मगर जब आरोप सही निकले तो उनकी योग्यता के सभी कायल हो गए और उन्हें प्रोत्साहित करने के लिए फिर उन्हें उसी पोस्ट पर तैनात कर दिया गया। एक और सज्जन थे-कृष्णा मेनन। रक्षा मंत्री थे। विपक्ष ने उन पर हमला करके उन्हें जीप खरीद कांड में फंसा दिया। भ्रष्टाचार हटाने में तत्परता दिखाते हुए उन्हें भी तुरंत हटा दिया गया। मगर प्रतिभा का सम्मान भी तो कोई चीज़ होती है। विज्ञ सर्वत्र पूज्यते। विद्वान की सब जगह पूजा होती है। थोड़े दिन बाद उन्हें फिर उसी पद पर बैठा दिया गया। माइंड इट .. हमें भ्रष्टाचार सिर्फ हटाना है। मिटाना नहीं है। विरोधी खलीफाओं ने तो डैडी की फोर्स को भी बोफोर्स बना दिया था। लालू ने बिहार में भ्रष्टाचार किया। उन्हें बिहार से तत्काल हटा दिया गया। बाद में अपनी इसी दुर्दांत प्रतिभा के बल पर ही वो रेलमंत्री बनाए गए। लोग सड़को पर उपवास करके भ्रष्टाचार हटाना चाहते हैं। भ्रष्टाचार क्या सड़क पर रहता है। वो हमेशा सत्ता की ओट में रहता है। उसे सड़क से कैसे हटाएंगे। इन अहमकों को कौन समझाए। अरे भ्रष्टाचार को हम-आप ही हटा सकते हैं। क्योंकि इस हुनर के हम खानदानी एक्सपर्ट हैं। भ्रष्टाचार को समय-समय पर हटाते रहना चाहिए। एक जगह रुक जाने पर वह सड़ जाता है। जगह बदलने पर वह बढ़ जाता है।  इसीलिए तो हम एक सख्त लोकपाल चाहते हैं। नक्कालों से सावधान। नई रोशनी लाएंगे भ्रष्टाचार हटाएंगे। एक चापलूसी जयकारे के साथ युवराज अंतर्ध्यान हो गए। बस..खेल खतम और पैसा हजम।
आई-204,गोविंदपुरम,ग़ज़ियाबाद-201013
मोबाइल-09810243966
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