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Sunday, August 5, 2012

'सतमोला कवियों की चौपाल'


कुछ अनुभव ऐसे होते हैं जो ये विश्वास जगाते हैं कि अभी भी सकारात्मक सोच से समर्पित भाव से कार्य करने वाले
लोगों की कमी नहीं है।किसी भी नये कवि-कलाकार के लिये आज भी टी वी स्क्रीन पर दिखना कितनी बडी बात है इसे वही समझ सकता है जो स्वयं ऐसे दौर से गुज़रा हो।वर्ष १९९४ में राजधानी दिल्ली आने के स्वाभाविक गंवई संकोच और शहरी आक्रामकता से अपरिचित मैं संयोगवश ही हिंदी अकादमी दिल्ली के कुछ सज्जन अधीकारियों के संपर्क में आया और दिल्ली के पटेल नगर में वर्ष १९९७ में पहली बार दिल्ली में मैने काव्यपाठ किया।मुझे याद है उस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि मीरा कुमार थीं ,जो आज लोकसभा अध्यक्ष है।जिस तरह से उस कार्यक्रम के बाद हिंदी अकादमी के अधीकारियों जिनमें श्री प्रकाश लखचौरा और अकादमी के तत्कालीन सचिव डा० रामशरण गौड ने मुझे हाथो -हाथ लिया मेरी कवितायें मगवायी और बिना किसी प्रयास के वर्ष १९९८ में मेरा पहला काव्य संग्रह "मैं अंगार लिखता हूं" प्रकाशित हुआ आज भी मुझे परी कथा सा लगता है।
आज ये सब बातें आपसे शेयर करने का मन इसलिये हुआ क्योंकि कल फिर ऐसा ही अवसर से गुजरना हुआ।देश के सुदूर अंचलों से आये युवा कवियों को वरिष्ठ कवियों के साथ मंच का सहभागी होने का अवसर प्रदान करने का पुनीत कार्य करते अपने पुराने मित्र प्रवीण आर्य को देख लगा कि वे आज के इन युवाओं के लिये वही रोल अदा कर रहे हैं जो कभी डा० रामशरण गौड ने मेरे लिये किया था।इस आयोजन का सहभागी मै भी था।मैने टी वी कैमरा पहली बार वर्ष २००० में दूरदर्शन के पत्रिका कार्यक्रम के लिये फेस किया था जिसका श्रेय मेरी कविता को कम पं० सुरेश नीरव के आशीर्वाद और डा० अमरनाथ अमर की सज्जनता को अधिक है।कल वरिष्ठ कवियों मे जहां पं० सुरेश नीरव,बी०एल०गौड,ममता किरण ,ओमपालसिंह निडर,मोहन द्विवेदी,अरूण सागर ,मैं(अरविंद पथिक)आदि शामिल थे वही नवोदित कवियों में सुदूर पूर्वांचल ,मध्य प्रदेश और राजस्थान से आये तमाम प्रतिभावान युवा शामिल थे जो भविष्य में हिंदी कविता की वाचिक परंपरा के ध्वज वाहक बनेंगे'मैं उन सबके उज्जवल भविष्य की कामना करता हूं।'सतमोला कवियों की चौपाल' के सर्वेसर्वा भाई प्रवीण आर्य यद्यपि आयु और कविता में मुझसे बडे
हैं पर उन्होने जिस तरह मुझे अग्रज और वरिष्ठ कहकर सम्मान दिया उसके लिये और जिस मिशनरी भावना से कविता के लिये वे प्राण -पण से समर्पित हैं उसके लिये भी मैं उन्हे धन्यवाद कहना चाहता हूं।
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