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Saturday, August 4, 2012

आपकी अदा धांसू है, निराली है।

धन्य हैं रजनीकांत राजूजी
रजनीकांत राजू
अन्ना हजारे पर आपकी कविता पढ़कर 
मन प्रसन्न हो गया।
लगता है अब हास्य-व्यंग्य कवियों की 
शामत आनेवाली है। 
आपकी अदा धांसू है, निराली है।
-पंडित सुरेश नीरव
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