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Wednesday, September 12, 2012

स्वाधीनता हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है

हिंदी की दशा और दिश
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हिंदी पखवाड़े के संदर्भ में एन.टी.पी.सी. के नोएडा स्थित कार्यालय द्वारा आयोजित राजभाषा कार्यशाला में हिंदी के लब्ध-प्रतिष्ठ कवि एवं पत्रकार पंडित सुरेश नीरव ने हिंदी की दशा और दिशा पर अपना वक्तव्य देते हुए कहा कि हिंदी तो उस दिन ही देश की राष्ट्रभाषा बन गई थी जब महाराष्ट्र केसरी लोकमान्य तिलक ने हिंदी में उदघोष किया था कि-स्वाधीनता हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है। जिस दिन बंग्लाबंधु नेताजी सुभाष चंद्रबोस ने हिंदी में दिल्ली चलो का नारा लगाया था, पंजाबी स्वाभिमान के सिंह सरदार भगतसिंह ने जब हिंदी में ही- मेरा रंग दे वसंती चोला-जैसा ओदस्वी गीत गाया था या फिर जिस दिन गुजरातीभाषी महात्मा गांधी ने अंग्रेजो भारत छोड़ो का नारा हिंदी में लगाया था। सचमुच आजादी से पहले हिंदी देश की एकता का प्रतीक बन गई थी। आजीदी के बाद वही हिंदी हिंग्लिश बनकर अपनी बदहाली पर आंसू बहा रही है। उपस्थित सुधि श्रोताओं एवं अधिकारियों ने पूरे एक घंटे तक मंत्रमुग्ध होकर पंडित सुरेश नीरव के विचारों को सुना और शिद्दत से सराहा।
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