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Saturday, October 20, 2012

मधुर रस धार

मधुर रस धार
लो उतर आया जमीं पर चाँद ,तुम दीदार कर लो .
दूर से देखा बहुत होगा ,अब इस से प्यार कर लो .
दूर अम्बर में लटकता और भटकता था .
देख हमको , ताल में ये ही मटकता था .
होश खो देता हमारा ज्ञान ,ये सत्कार कर लो .
लो उतर आया जमी पर चाँद .............
भूल कर निज पथ इसीने शांत यह जीवन घुमाया .
उम्र थी कच्ची बड़ा भटकाव इस ने ही रुलाया .
अब ले आया हूँ में इसको बाँध, आँखें चार कर लो .
लो यत्र आया जमीं पर चाँद ................

***** डॉ मधुर
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मधुर रस धार -------------
आज ह्रदय की सहज चेतना ,पहुँच गई है द्वार तुम्हारे .
दीप जले अवचेतन मन मैं,नव यौवन के खिले सितारे .
ये पच्चीस बरस का जीवन ,जो गुजरा तेरी यादों में .
एक नया संसार रच लिया , मधुर प्रेम के अपवादों में .
खलती रहीं तुम्हारी सुधियाँ ,छलती रहीं सुहानी रातें .
अपनी गति से चली जिंदगी ,तुम बन गईं पुरानी बातें .
कुछ पल को विश्राम मिला तो ,आज मधुर तुम को सोचा है .
तुलना करने लगीं भावना ,मुझ में तुम में अन्तेर क्या है .
तुम अपने जीवन में पाई ,अपने पथ का मिला सवेरा .
मेने भी कुछ पाया ही है, प्रिये छोड़ कर दामन तेरा .
इस गहमा गहमी के जग में, आजा थोडा सा सुस्ता लें .
मैने तुम ने तब गया था , आओ वही तराना गा लें .........

******* डॉ . मधुर
 
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